छत्तीसगढ़ सूरजपुर में सनसनीखेज खुलासा :
वीडियो, वसीयत और कोर्ट केस के बीच थाने पहुंचा विवाद”
चंद्रिका कुशवाहा, सूरजपुर
जिले के चंदौरा थाना क्षेत्र अंतर्गत ग्राम पहिया और मायापुर-1 के बीच पैतृक जमीन को लेकर वर्षों पुराना विवाद अब तूल पकड़ता नजर आ रहा है। एक पक्ष ने आरोप लगाया है कि न्यायालय में मामला लंबित होने के बावजूद दूसरे पक्ष ने दर्जनों लोगों के साथ पहुंचकर विवादित भूमि पर जबरन ट्रैक्टर से जुताई कर कब्जा करने का प्रयास किया। वहीं दूसरे पक्ष ने सभी आरोपों को निराधार बताते हुए दावा किया है कि संबंधित जमीन उनके नाम राजस्व अभिलेखों में दर्ज है और वे अपनी वैधानिक भूमि पर खेती कर रहे थे।

पहला पक्ष: कोर्ट में मामला लंबित, फिर भी जबरन जुताई का आरोप,
ग्राम पहिया निवासी सतन (28 वर्ष), पिता तरुण कुमार ने चंदौरा थाने में शिकायत दर्ज कराई है कि ग्राम पहिया स्थित उनकी पैतृक भूमि के कई खसरा नंबरों पर उनका स्वत्व एवं अधिपत्य है। शिकायत के अनुसार, यह भूमि पहले उनकी बड़ी दादी लखमेन के नाम दर्ज थी, लेकिन आरोप है कि सिगांचन सिंह एवं दुर्गा सिंह ने कथित रूप से फर्जी वसीयतनामा के आधार पर अपने नाम दर्ज करा लिया। इस संबंध में प्रतापपुर न्यायालय में दीवानी वाद लंबित है, जिसकी अगली सुनवाई 20 जुलाई 2026 को निर्धारित है।
शिकायत में आरोप लगाया गया है कि 25 जून को सिगांचन सिंह, दुर्गा सिंह सहित करीब 15 अन्य लोग ट्रैक्टर, लाठी-डंडे, टांगी और बलुवा लेकर विवादित भूमि पर पहुंचे और जबरन जुताई शुरू कर दी। विरोध करने पर गाली-गलौज, जान से मारने की धमकी देने तथा मौके से भगा देने का आरोप भी लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने घटना का वीडियो होने का दावा करते हुए दोषियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज कर कड़ी कार्रवाई की मांग की है।
दूसरा पक्ष: जमीन हमारी, रिकॉर्ड में नाम दर्ज, झूठे आरोप लगाए जा रहे,
वहीं दूसरे पक्ष के दुर्गा सिंह ने आरोपों को पूरी तरह गलत बताया है। उनका कहना है कि संबंधित भूमि उनकी पैतृक संपत्ति है। पहले यह जमीन उनके चाचा के नाम थी, जिन्होंने वर्ष 1996 में विधिवत वसीयतनामा उनके पक्ष में किया था। उसी आधार पर राजस्व रिकॉर्ड में उनके परिवार का नाम दर्ज है।
दुर्गा सिंह का कहना है कि शिकायतकर्ता का नाम किसी भी राजस्व रिकॉर्ड में दर्ज नहीं है। उन्होंने आरोप लगाया कि पूर्व में शिकायतकर्ता द्वारा उनकी जमीन की जुताई की गई थी, जिसकी शिकायत उन्होंने पुलिस से की थी, लेकिन उस समय कोई कार्रवाई नहीं हुई। उन्होंने यह भी बताया कि जुताई शुरू करने से पहले उनके पिता ने थाना प्रभारी से फोन पर चर्चा कर स्थिति की जानकारी दी थी और उसके बाद ही खेत की जुताई की गई।
पुलिस जांच के बाद होगी स्थिति स्पष्ट,
फिलहाल दोनों पक्ष जमीन पर अपना-अपना अधिकार जता रहे हैं। एक ओर मामला न्यायालय में विचाराधीन है, वहीं दूसरी ओर पुलिस में भी शिकायत दर्ज कराई गई है। ऐसे में अब यह देखना होगा कि पुलिस जांच और न्यायालय के निर्णय के बाद विवादित भूमि पर वास्तविक अधिकार किसका साबित होता है।
(नोट: यह मामला दोनों पक्षों के दावों और शिकायतों पर आधारित है। भूमि स्वामित्व और आरोपों की सत्यता का अंतिम निर्णय पुलिस जांच और न्यायालय के आदेश के बाद ही स्पष्ट होगा।)

