Pellet Gun Case: Supreme Court में Pellet Gun के इस्तेमाल पर रोक लगाने की मांग को लेकर दायर याचिका के बीच एक याचिकाकर्ता की Medical Report (MLC) सामने आई है। रिपोर्ट में सर्जरी के दौरान शरीर के विभिन्न हिस्सों से धातु के छोटे-छोटे कण निकाले जाने का उल्लेख किया गया है। वहीं, सुरक्षा एजेंसियों का कहना है कि कार्रवाई निर्धारित दंगा-रोधी नियमों के अनुसार की गई थी।
‘Sansad Chalo’ March के दौरान घायल होने का दावा
याचिकाकर्ताओं यशोवर्धन आजाद, प्रशांत कुमार और शेख इरशाद मंसूरी ने Supreme Court में याचिका दायर कर आरोप लगाया है कि 20 जुलाई को दिल्ली में आयोजित ‘Sansad Chalo’ March के दौरान RAF द्वारा Pellet Gun का इस्तेमाल किया गया, जिससे वे घायल हुए। शेख इरशाद मंसूरी का दावा है कि पंप-एक्शन गन से दागे गए छर्रे उनके शरीर में धंस गए, जिससे उन्हें गंभीर चोटें आईं।
Medical Report में क्या सामने आया?
Lady Hardinge Medical College की MLC Report के अनुसार, शेख इरशाद मंसूरी के सिर, गर्दन और चेहरे के कई हिस्सों में धातु के कण फंसे हुए पाए गए। ENT Surgery के दौरान दाएं चेहरे की हड्डी, दाएं कंधे, दाईं गर्दन और बाएं माथे से लगभग 2 मिमी आकार के धातु कण निकाले गए।
इसके अलावा Ophthalmology Department ने बाईं आंख और निचली पलक के पास सर्जरी कर लगभग 3×3 मिमी का एक विदेशी धातु कण भी निकाला। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, सर्जरी के बाद उनके शरीर से कुल सात धातु के कण निकाले गए, जबकि कुछ कण अब भी चेहरे के आसपास मौजूद होने का दावा किया गया है।
RAF और CRPF का पक्ष
एक समाचार रिपोर्ट के मुताबिक, RAF Logbook में 20 जुलाई को सात राउंड फायरिंग दर्ज होने की बात कही गई है। वहीं CRPF की रिपोर्ट के अनुसार, प्रदर्शन के दौरान की गई पुलिस कार्रवाई में सभी Standard Operating Procedures (SOPs) और दंगा-रोधी दिशा-निर्देशों का पालन किया गया।
Supreme Court में क्या है मांग?
याचिकाकर्ताओं ने Supreme Court से Pellet Gun के इस्तेमाल पर रोक लगाने और इस मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। मामले की सुनवाई के दौरान अदालत के समक्ष याचिकाकर्ताओं के दावे, मेडिकल रिकॉर्ड और सुरक्षा एजेंसियों का पक्ष महत्वपूर्ण रहेगा।

