नई दिल्ली। सनातन धर्म में विवाह से पहले वर और वधू की कुंडली का मिलान करने की परंपरा है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, कुंडली मिलान से यह देखा जाता है कि दोनों के स्वभाव, स्वास्थ्य, वैवाहिक जीवन और पारिवारिक सुख में कितना सामंजस्य रहेगा। माना जाता है कि गुण मिलान के बाद विवाह करने से दांपत्य जीवन अधिक सुखद और स्थिर रहता है।
कुंडली में होते हैं 36 गुण
अष्टकूट मिलान में कुल 36 गुण होते हैं, जिनका विभाजन इस प्रकार किया गया है—
- नाड़ी – 8 गुण
- भकूट – 7 गुण
- गण – 6 गुण
- ग्रह मैत्री – 5 गुण
- योनि – 4 गुण
- तारा – 3 गुण
- वश्य – 2 गुण
- वर्ण – 1 गुण
शादी के लिए कितने गुण मिलना शुभ माना जाता है?
ज्योतिष मान्यताओं के अनुसार, विवाह के लिए कम से कम 18 गुण मिलना आवश्यक माना जाता है। यदि 18 या उससे अधिक गुण मिलते हैं तो विवाह योग्य माना जाता है। वहीं, 24 से 32 गुण मिलने पर वैवाहिक जीवन को अच्छा और 32 से अधिक गुण मिलने पर अत्यंत शुभ माना जाता है।
हालांकि, यदि 18 से कम गुण मिलते हैं तो विवाह से पहले अनुभवी ज्योतिषाचार्य से विस्तृत कुंडली का विश्लेषण कराने की सलाह दी जाती है, क्योंकि केवल गुणों की संख्या ही अंतिम आधार नहीं होती।
नाड़ी दोष क्यों माना जाता है महत्वपूर्ण?
अष्टकूट मिलान में नाड़ी के 8 गुण सबसे अधिक महत्व रखते हैं। यदि वर और वधू की नाड़ी समान होती है तो नाड़ी दोष बनता है। पारंपरिक ज्योतिष मान्यताओं में इसे वैवाहिक जीवन, संतान सुख और स्वास्थ्य के दृष्टिकोण से महत्वपूर्ण माना गया है।
नाड़ी दोष होने पर क्या करें?
यदि कुंडली में नाड़ी दोष बन रहा हो, तो ज्योतिषाचार्य की सलाह से निम्न उपाय किए जा सकते हैं—
- विवाह से पहले नाड़ी दोष शांति पूजा कराएं।
- भगवान शिव और माता पार्वती की नियमित पूजा करें।
- महामृत्युंजय मंत्र का जाप करें।
- योग्य एवं अनुभवी ज्योतिषाचार्य से संपूर्ण कुंडली का विश्लेषण अवश्य कराएं।
नोट: ज्योतिष शास्त्र आस्था और पारंपरिक मान्यताओं पर आधारित है। विवाह जैसे महत्वपूर्ण निर्णय केवल गुण मिलान के आधार पर नहीं, बल्कि दोनों परिवारों की सहमति, आपसी समझ, स्वभाव और अन्य व्यावहारिक पहलुओं को ध्यान में रखकर लेने चाहिए।

