चंद्रिका कुशवाहा
सूरजपुर। एक ओर राज्य सरकार प्रशासन को गांव-गांव तक पहुंचाने और आम नागरिकों को समयबद्ध सेवाएं उपलब्ध कराने के बड़े-बड़े दावे कर रही है, वहीं दूसरी ओर सूरजपुर जिले के रामानुजनगर विकासखंड अंतर्गत स्थित देवनगर तहसील कार्यालय बदहाल व्यवस्थाओं का जीवंत उदाहरण बनकर सामने आया है। कर्मचारियों की भारी कमी, पेयजल संकट, बिजली व्यवस्था की खामियां और मूलभूत संसाधनों के अभाव ने यहां की व्यवस्था को पूरी तरह प्रभावित कर दिया है। हालात यह हैं कि प्रतिदिन सैकड़ों ग्रामीण अपने जरूरी कार्यों के लिए तहसील कार्यालय पहुंचते हैं, लेकिन उन्हें घंटों इंतजार करने और बार-बार चक्कर लगाने को मजबूर होना पड़ रहा है।
देवनगर तहसील क्षेत्र के अंतर्गत लगभग 25 से 30 ग्राम पंचायतें आती हैं। हजारों ग्रामीण नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, ऋण पुस्तिका, नक्शा-खसरा, आय, जाति और निवास प्रमाण पत्र सहित विभिन्न राजस्व संबंधी कार्यों के लिए इसी कार्यालय पर निर्भर हैं। लेकिन हैरानी की बात यह है कि इतने बड़े क्षेत्र की जिम्मेदारी वर्तमान में मात्र दो लिपिकों के कंधों पर टिकी हुई है। परिणामस्वरूप फाइलों का निपटारा धीमी गति से हो रहा है और लोगों को दिनों तक कार्यालय के चक्कर लगाने पड़ रहे हैं।
प्यास बुझाने के लिए खरीदनी पड़ रही पानी की बोतल
तहसील कार्यालय की सबसे बड़ी समस्या पेयजल व्यवस्था को लेकर सामने आ रही है। ग्रामीणों का आरोप है कि कार्यालय में पानी की समुचित व्यवस्था नहीं है। एक घड़ा रखा गया है, लेकिन उसमें भी नियमित रूप से पानी उपलब्ध नहीं रहता। दूर-दराज के गांवों से आने वाले बुजुर्ग, महिलाएं और किसान गर्मी में घंटों कार्यालय परिसर में बैठे रहते हैं, लेकिन पीने के पानी तक की व्यवस्था नहीं मिलती। मजबूरन लोगों को बाजार से 20 रुपये की पानी की बोतल खरीदकर प्यास बुझानी पड़ती है।
ग्रामीणों का कहना है कि जब एक तहसील कार्यालय जैसी महत्वपूर्ण शासकीय संस्था में पेयजल जैसी मूलभूत सुविधा उपलब्ध नहीं है, तो आम जनता को सरकार की सुविधाओं का लाभ कैसे मिलेगा, यह बड़ा प्रश्न है।
बिजली गई तो ठप हो जाते हैं काम
कार्यालय में इनवर्टर जैसी वैकल्पिक व्यवस्था भी उपलब्ध नहीं है। बिजली आपूर्ति बाधित होते ही कम्प्यूटर आधारित कार्य पूरी तरह रुक जाते हैं। इससे प्रमाण पत्र जारी करने, दस्तावेज तैयार करने और ऑनलाइन सेवाओं का कार्य प्रभावित होता है। कई बार लोगों को केवल बिजली नहीं होने के कारण खाली हाथ लौटना पड़ता है।
फोटोकॉपी मशीन नहीं, बाजार के चक्कर लगाने को मजबूर लोग
राजस्व संबंधी कार्यों में दस्तावेजों की प्रतियां आवश्यक होती हैं, लेकिन तहसील कार्यालय में फोटोकॉपी मशीन की सुविधा नहीं है। लोगों को छोटे-छोटे दस्तावेजों की कॉपी कराने के लिए बाजार जाना पड़ता है। इससे समय और धन दोनों की अतिरिक्त बर्बादी होती है।
कोटवारों से कराए जा रहे सफाई और दफ्तरी कार्य
ग्रामीणों द्वारा लगाया गया सबसे गंभीर आरोप यह है कि कार्यालय में भृत्य और सफाईकर्मी की कमी के कारण ग्राम कोटवारों से सफाई, पानी भरने, फाइलें लाने-ले जाने, चाय-नाश्ता व्यवस्था तथा अन्य दफ्तरी कार्य कराए जा रहे हैं। जबकि कोटवारों की नियुक्ति गांवों में राजस्व सूचनाओं के संप्रेषण एवं प्रशासनिक सहयोग के लिए की जाती है। यदि यह आरोप सही हैं तो यह न केवल कार्य विभाजन के नियमों के विपरीत है, बल्कि कोटवारों के मूल दायित्वों को भी प्रभावित करने वाला मामला है।
नायब तहसीलदार की कार्यशैली पर भी सवाल
कुछ ग्रामीणों ने नायब तहसीलदार की कार्यशैली और आम जनता के प्रति व्यवहार को लेकर भी असंतोष व्यक्त किया है। लोगों का कहना है कि समस्याओं के समाधान और जनता से संवाद की प्रक्रिया को अधिक संवेदनशील और सहज बनाने की आवश्यकता है। हालांकि इस संबंध में संबंधित अधिकारियों का पक्ष प्राप्त नहीं हो सका है।
ग्रामीणों ने की त्वरित हस्तक्षेप की मांग
देवनगर क्षेत्र के ग्रामीणों ने कलेक्टर एवं जिला प्रशासन से मांग की है कि तहसील कार्यालय में अतिरिक्त कर्मचारियों की तत्काल पदस्थापना की जाए, भृत्य एवं सफाईकर्मी उपलब्ध कराए जाएं, पेयजल, इनवर्टर और फोटोकॉपी मशीन जैसी मूलभूत सुविधाएं स्थापित की जाएं तथा कार्यालय की व्यवस्थाओं की समीक्षा कर आवश्यक सुधार किए जाएं।
ग्रामीणों का कहना है कि यदि समय रहते इन समस्याओं का समाधान नहीं किया गया तो जनता का प्रशासन पर विश्वास कमजोर होगा और लोगों की परेशानियां लगातार बढ़ती जाएंगी। अब देखना यह होगा कि जिला प्रशासन देवनगर तहसील की बदहाल व्यवस्था को सुधारने के लिए क्या कदम उठाता है या फिर हजारों ग्रामीण इसी तरह मूलभूत सुविधाओं के लिए संघर्ष करते रहेंगे।

