एसडीएम के आदेश के खिलाफ एकजुट हुए निर्वाचित पंच, बोले- आदिवासी सरपंच के साथ हुआ अन्याय; प्रशासनिक फैसले पर उठे गंभीर सवाल,
चंद्रिका कुशवाहा ,सूरजपुर
जिले के प्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत ग्राम पंचायत मदननगर में सोमवार को उस समय बड़ा राजनीतिक और प्रशासनिक घटनाक्रम सामने आया, जब पंचायत की बर्खास्त सरपंच श्रीमती सुंदरी बाई के समर्थन में पंचायत के 20 निर्वाचित पंचों ने सामूहिक रूप से अपने पद से इस्तीफा सौंप दिया। इस सामूहिक इस्तीफे ने पूरे क्षेत्र की राजनीति और पंचायत व्यवस्था में नई बहस छेड़ दी है। ग्रामीण इसे आदिवासी नेतृत्व के सम्मान से जुड़ा मुद्दा बता रहे हैं, जबकि प्रशासन पहले ही सरपंच को शासकीय कार्य में बाधा पहुंचाने के आरोप में पद से पृथक कर चुका है।
पंचों द्वारा अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) एवं विहित प्राधिकारी, प्रतापपुर को सौंपे गए इस्तीफा पत्र में कहा गया है कि ग्राम पंचायत मदननगर की आदिवासी महिला सरपंच को छत्तीसगढ़ पंचायत राज अधिनियम, 1993 की धारा 40(1)(ख) के तहत असंवैधानिक और विधि-विरुद्ध तरीके से बर्खास्त किया गया है। पंचों का आरोप है कि सरपंच सुंदरी बाई क्षेत्र के आदिवासी किसानों की आवाज उठा रही थीं तथा भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया में पांचवीं अनुसूची और पेसा कानून के प्रावधानों का पालन नहीं किए जाने पर उन्होंने आपत्ति दर्ज कराई थी। इसी कारण उनके विरुद्ध कार्रवाई की गई।
इस्तीफा देने वाले पंचों ने अपने पत्र में उल्लेख किया है कि सरपंच के खिलाफ की गई कार्रवाई से वे आहत हैं और विरोध स्वरूप स्वेच्छा से अपने पद से त्यागपत्र दे रहे हैं। उन्होंने प्रशासन से तत्काल प्रभाव से उनके इस्तीफे स्वीकार करने की मांग की है।

क्या था पूरा मामला,
गौरतलब है कि मदननगर, कनकनगर और जगन्नाथपुर क्षेत्र में प्रस्तावित एसईसीएल भटगांव ओपन कास्ट कोयला परियोजना के लिए भूमि अधिग्रहण एवं डीजीपीएस सर्वे का कार्य किया जा रहा था। प्रशासन के अनुसार 2 और 3 अप्रैल 2026 को सर्वेक्षण के दौरान ग्रामीणों द्वारा विरोध प्रदर्शन किया गया, जिसमें सरपंच सुंदरी बाई पर ग्रामीणों का नेतृत्व करने तथा शासकीय कार्य में बाधा उत्पन्न करने का आरोप लगाया गया।
प्रकरण की सुनवाई के बाद अनुविभागीय अधिकारी (राजस्व) प्रतापपुर ने उपलब्ध अभिलेखों, गवाहों के बयान और प्रस्तुत साक्ष्यों के आधार पर 8 जुलाई 2026 को आदेश पारित करते हुए सरपंच सुंदरी बाई को पंचायत राज अधिनियम की धारा 40(1)(ख) के तहत तत्काल प्रभाव से पद से पृथक कर दिया था।
सरपंच का पक्ष भी रहा अलग,
सुनवाई के दौरान सरपंच सुंदरी बाई ने प्रशासन के आरोपों से इनकार किया था। उनका कहना था कि ग्रामसभा को सर्वेक्षण की पूर्व सूचना नहीं दी गई थी और न ही उन्होंने ग्रामीणों को उकसाया। उन्होंने यह भी तर्क रखा था कि मदननगर पांचवीं अनुसूची क्षेत्र में आता है, जहां पेसा कानून लागू है और ग्रामसभा की सहमति एवं सहभागिता आवश्यक है। हालांकि प्रशासन ने इन दलीलों को स्वीकार नहीं किया और उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर कार्रवाई की।
20 पंचों की एकजुटता बनी चर्चा का विषय,
सोमवार को पंचायत के कुल 20 पंचों द्वारा एक साथ इस्तीफा दिए जाने से पूरे प्रतापपुर क्षेत्र में इस मुद्दे की चर्चा तेज हो गई है। राजनीतिक और सामाजिक हलकों में इसे पंचायत स्तर पर एक बड़ी घटना माना जा रहा है। ग्रामीणों का कहना है कि इतने बड़े स्तर पर निर्वाचित पंचों का सामूहिक इस्तीफा पंचायत व्यवस्था में असंतोष का संकेत है।
भूमि अधिग्रहण को लेकर पहले से चल रहा है विवाद,
मदननगर क्षेत्र में एसईसीएल की प्रस्तावित कोयला परियोजना को लेकर लंबे समय से ग्रामीणों और प्रशासन के बीच मतभेद की स्थिति बनी हुई है। प्रभावित ग्रामीण भूमि अधिग्रहण, पुनर्वास, मुआवजा तथा ग्रामसभा की भूमिका जैसे मुद्दों को लेकर लगातार अपनी बातें उठाते रहे हैं। अब पंचों के सामूहिक इस्तीफे के बाद यह मामला और अधिक संवेदनशील हो गया है।
इन पंचों ने सौंपा इस्तीफा,
सामूहिक इस्तीफा देने वालों में सुनीता बेक, अमृता केसरी, हिरामती बेक, रामविनोद खाखा, धनसाय खेस, नन्की आयम, छोटेलाल कुजूर, अजय मिंज, कालीचरण, राधिका करसायल, फूलकुमारी साण्डिल्य, मानती खलखों, धरमजीत मिंज, दीपा टोप्पों, बीगन गिद्ध, करीमन, गीता गिद्ध, अमिला मिंज, करमु खलखों और बिसनी किस्पोट्टा शामिल हैं।
अब निगाहें इस बात पर टिकी हैं कि प्रशासन इन सामूहिक इस्तीफों पर क्या निर्णय लेता है और पंचायत में उत्पन्न इस असाधारण स्थिति का समाधान किस प्रकार किया जाता है। वहीं, क्षेत्र में इस घटनाक्रम ने प्रशासनिक कार्रवाई, पंचायत स्वायत्तता और आदिवासी क्षेत्रों में भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया को लेकर नई बहस को जन्म दे दिया है।

