बलरामपुर : महिला शिक्षिकाओं से अभद्र व्यवहार के गंभीर आरोपों के बावजूद 5 दिन बाद भी कार्रवाई नहीं, शिक्षा विभाग की कार्यशैली पर उठे सवाल,
प्रधानपाठक मनोज गुप्ता पर महिला शिक्षिकाओं ने लगाए गंभीर आरोप, विधायक के निर्देश के बाद भी विभाग मौन,
बलरामपुर/वाड्रफनगर,
बलरामपुर जिले के वाड्रफनगर विकासखंड अंतर्गत प्राथमिक विद्यालय भरूहीबांस के प्रधानपाठक मनोज गुप्ता पर महिला शिक्षिकाओं द्वारा लगाए गए गंभीर आरोपों के बावजूद शिक्षा विभाग की ओर से अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं किए जाने से विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े हो रहे हैं। महिला शिक्षिकाओं ने आरोप लगाया है कि प्रधानपाठक ने उनके साथ कई बार अभद्र व्यवहार किया और उनकी गरिमा को ठेस पहुंचाने वाली हरकतें कीं। मामले की लिखित शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी और क्षेत्रीय विधायक से की गई थी, लेकिन शिकायत के कई दिन बाद भी कार्रवाई नहीं होने से पीड़ित शिक्षिकाओं में नाराजगी है।
स्तनपान कराते समय छिपकर देखने का आरोप,
शिकायत में महिला शिक्षिकाओं ने आरोप लगाया है कि प्रधानपाठक मनोज गुप्ता ने एक शिक्षिका को बच्चे को स्तनपान कराते समय छिपकर देखने का प्रयास किया। शिक्षिकाओं का कहना है कि इस घटना से वे मानसिक रूप से बेहद आहत हुईं। उनका आरोप है कि विद्यालय का वातावरण असुरक्षित और असहज बन गया है, जिससे महिला कर्मचारियों को भय और असुरक्षा की भावना के बीच काम करना पड़ रहा है।

मासिक धर्म के दौरान मेडिकल सर्टिफिकेट मांगने का भी आरोप,
शिकायत में यह भी उल्लेख किया गया है कि मासिक धर्म के दौरान अवकाश लेने पर प्रधानपाठक ने महिला शिक्षिकाओं से मेडिकल सर्टिफिकेट प्रस्तुत करने की मांग की। शिक्षिकाओं का कहना है कि इस प्रकार की मांग न केवल संवेदनहीन है, बल्कि महिलाओं की निजता और सम्मान का भी उल्लंघन है। उन्होंने इसे मानसिक उत्पीड़न और अनुचित व्यवहार बताया है।
जिला शिक्षा अधिकारी और विधायक से की गई थी लिखित शिकायत,
गंभीर आरोपों के बाद महिला शिक्षिकाओं ने पूरे मामले की लिखित शिकायत जिला शिक्षा अधिकारी और क्षेत्रीय विधायक से की थी। शिकायत मिलने के बाद विधायक ने अधिकारियों को मामले में शीघ्र और निष्पक्ष कार्रवाई करने के निर्देश दिए थे। इसके बावजूद शिक्षा विभाग की ओर से अब तक न तो किसी प्रकार की अनुशासनात्मक कार्रवाई की गई और न ही कोई स्पष्ट निर्णय सामने आया है।
पांच दिन बाद आया ज्वाइंट डायरेक्टर का बयान,
मामले में लगातार उठ रहे सवालों के बीच शिकायत के लगभग पांच दिन बाद संयुक्त संचालक (ज्वाइंट डायरेक्टर) राजेश सिंह का बयान सामने आया है। उन्होंने बताया कि जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय से आज प्रतिवेदन प्राप्त हुआ है। प्रतिवेदन का परीक्षण कर नियमानुसार जांच की जाएगी और उसके आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।

हालांकि, इतने गंभीर आरोपों के मामले में केवल प्रतिवेदन मिलने और जांच की बात कहे जाने से लोगों में यह सवाल उठ रहा है कि आखिर कार्रवाई शुरू होने में इतना समय क्यों लगा।
कार्रवाई में देरी से उठ रहे कई सवाल,
महिला शिक्षिकाओं से जुड़े इतने गंभीर आरोपों के बावजूद शिक्षा विभाग की धीमी कार्यवाही कई सवाल खड़े कर रही है।
क्या महिला कर्मचारियों की शिकायतों को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा?
विधायक के निर्देशों के बाद भी कार्रवाई क्यों नहीं हुई?
यदि आरोप इतने गंभीर हैं तो आरोपी प्रधानपाठक के खिलाफ अंतरिम प्रशासनिक कार्रवाई क्यों नहीं की गई?
क्या जांच पूरी होने तक भी पीड़ित शिक्षिकाओं को उसी वातावरण में काम करना पड़ेगा?
इन सवालों का जवाब फिलहाल शिक्षा विभाग के पास नहीं है।
निष्पक्ष जांच और कार्रवाई की मांग,
स्थानीय लोगों और शिक्षा जगत से जुड़े लोगों का कहना है कि मामला महिला सम्मान और कार्यस्थल की सुरक्षा से जुड़ा है। ऐसे मामलों में त्वरित, निष्पक्ष और पारदर्शी जांच आवश्यक है ताकि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो दोषी के खिलाफ सख्त कार्रवाई हो सके और यदि आरोप गलत हों तो तथ्यों के आधार पर स्थिति स्पष्ट हो सके।
फिलहाल सभी की निगाहें शिक्षा विभाग की आगामी कार्रवाई पर टिकी हैं। अब यह देखना होगा कि संयुक्त संचालक द्वारा जांच की बात कहे जाने के बाद विभाग कितनी तेजी से जांच पूरी करता है और आरोपों के संबंध में क्या निर्णय सामने आता है। मामले की गंभीरता को देखते हुए यह केवल एक विद्यालय का विवाद नहीं, बल्कि महिला कर्मचारियों की सुरक्षा, सम्मान और शिक्षा व्यवस्था में जवाबदेही से जुड़ा महत्वपूर्ण मुद्दा बन गया है।

