Last Updated:June 01, 2026, 11:47 IST
Alwar Animal Rescue: अलवर जिले से इंसानियत और संवेदनशीलता से जुड़ी एक मार्मिक घटना सामने आई है. यहां एक बेजुबान जानवर पिछले करीब 10 महीनों से एक कुएं में फंसा हुआ है. हैरानी की बात यह है कि इतने लंबे समय से स्थानीय परिवार उसकी देखभाल कर रहा है और रोजाना उसे रोटी तथा पानी पहुंचा रहा है, ताकि उसकी जान बची रहे. परिवार का कहना है कि उन्होंने कई बार प्रशासन और संबंधित विभागों से जानवर को सुरक्षित बाहर निकालने की मांग की, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं हो सकी है. इस घटना ने पशु संरक्षण और प्रशासनिक व्यवस्था को लेकर कई सवाल खड़े कर दिए हैं. ग्रामीणों ने जल्द से जल्द रेस्क्यू अभियान चलाकर बेजुबान को सुरक्षित बाहर निकालने की अपील की है.
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Alwar News: खैरथल-तिजारा जिले के किशनगढ़ बास क्षेत्र के मोटूका गांव में मानवता की मिसाल देखने को मिल रही है. गांव में एक बेजुबान जानवर पिछले 10 महीनों से अधिक समय से खुले कुएं में गिरा हुआ है. ग्रामीणों ने उसे बाहर निकालने के कई प्रयास किए, लेकिन सफलता नहीं मिल सकी. इसके बावजूद कुएं के पास रहने वाला एक परिवार रोजाना उसे खाना और पानी देकर जिंदा रखे हुए है. ग्रामीण अब प्रशासन से बेजुबान को सुरक्षित बाहर निकालने की मांग कर रहे हैं.
बेजुबान की सेवा करने वाले लखपत खान ने बताया कि 10 महीना से ज्यादा कुत्ता कुएं में गिरा हुआ है. जिसको निकालने के लिए कई बार प्रशासन को अवगत कराया लेकिन अभी तक बेजुबान का रेस्क्यू नहीं कर पाए हैं. उन्होंने बताया कि आपस में कई कुत्ते लड़ रहे थे इस दौरान लड़ते-लड़ते एक कुत्ता कुएं में गिर गया. उस समय इसको निकालने का प्रयास भी किया लेकिन सफलता नहीं मिली. लेकिन तभी से वह इस कुत्ते की रोटी और पानी डालकर सेवा कर रहे हैं.
रोज सुबह-शाम रोटियां डालकर कुत्ते का पेट भर रहा
लखपत खान के भतीजे अरशद खान ने बताया कि उनके चाचा कई महीनो से रोज सुबह-शाम रोटियां डालकर कुत्ते का पेट भर रहा है. वहीं घर से निकलने वाला उपयोग किया हुआ पानी कुएं में जाने से उसी से उसकी प्यास बुझ रही है. जिसकी शिकायत किशनगढ़ बास एसडीएम और पटवारी को दी गई, उन्होंने आश्वासन दिया कि जल्द ही इसका रेस्क्यू करके बाहर निकाला जाएगा. लेकिन अभी तक कुत्ते का रेस्क्यू कर बाहर नहीं निकाल पाया है.
पशु प्रेमी संस्थाओं से रेस्क्यू अभियान चलाने की मांग
ग्रामीणों का कहना है कि कुएं के पास सुरक्षित रेस्क्यू के लिए जरूरी उपकरण नहीं हैं. लंबे समय से कुएं में फंसे रहने के कारण कुत्ते की सेहत पर भी असर पड़ सकता है. ग्रामीणों ने प्रशासन और पशु प्रेमी संस्थाओं से रेस्क्यू अभियान चलाने की मांग की है. उन्होंने कहा कि प्रशासनिक मदद से बेजुबान की जान बचाई जा सकती है. लोगों ने यह भी कहा कि कुएं के आसपास सुरक्षा इंतजाम नहीं होने के कारण भविष्य में भी इस तरह की घटनाओं का खतरा बना रहता है. इसलिए कुएं की घेराबंदी या उसे ढकने की भी मांग उठ रही है, ताकि इसमें पशु, जानवर गिर सकता है. लेकिन कई महीने का लंबा समय बीत जाने के बाद भी प्रशासन या आपदा प्रबंधन की टीम को इसकी भनक तक नहीं है.
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