डॉक्टरों ने जवाब दिया, आस्था ने चमत्कार किया! ऐसे बना स्वर्णगिरी मंदिर
Last Updated:June 01, 2026, 12:40 IST
Swarnagiri Jain Mandir: राजस्थान का भव्य स्वर्णगिरी मंदिर केवल अपनी विशाल वास्तुकला और धार्मिक महत्व के लिए ही नहीं, बल्कि उससे जुड़ी प्रेरणादायक कहानी के लिए भी प्रसिद्ध है. कहा जाता है कि मंदिर निर्माण की प्रेरणा एक ऐसे अनुभव से जुड़ी है, जब गंभीर बीमारी के दौरान डॉक्टरों ने उम्मीद छोड़ दी थी. कठिन परिस्थितियों में भगवान के प्रति अटूट श्रद्धा और विश्वास ने नई ऊर्जा दी, जिसे कई लोग चमत्कार के रूप में देखते हैं. इसी आस्था और संकल्प ने आगे चलकर 22 एकड़ में फैले भव्य स्वर्णगिरी मंदिर के निर्माण का मार्ग प्रशस्त किया. मंदिर अपनी शानदार नक्काशी, दिव्य वातावरण और आध्यात्मिक महत्व के कारण देशभर से श्रद्धालुओं और पर्यटकों को आकर्षित करता है. यह केवल पूजा-अर्चना का केंद्र नहीं, बल्कि विश्वास, धैर्य और समर्पण की एक जीवंत मिसाल भी माना जाता है.
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हैदरबाद: हैदराबाद से महज 60 किलोमीटर दूर, भुवनगिरी की हरी-भरी पहाड़ियों के बीच स्थित स्वर्णगिरी वेंकटेश्वर स्वामी मंदिर इन दिनों श्रद्धालुओं के लिए आस्था और शांति का एक बड़ा केंद्र बनकर उभर रहा है. लगभग 22 एकड़ के विशाल क्षेत्र में फैले इस मंदिर को गोल्डन हिल भी कहा जाता है. हर दिन यहाँ सैकड़ों की संख्या में भक्त भगवान वेंकटेश्वर के दर्शन के लिए उमड़ रहे हैं लेकिन इस भव्य मंदिर के निर्माण के पीछे की कहानी किसी चमत्कार से कम नहीं है.
आश्रम सेवक अनुसार यह कहानी साल 2016 से शुरू होती है जब स्थानीय मन्नापल्ली परिवार के एक सदस्य का भीषण एक्सीडेंट हो गया था. डॉक्टरों ने उनके बचने की उम्मीद छोड़ दी थी और वे कोमा में चले गए थे. संकट की इस घड़ी में परिवार ने तिरुमला से लाया गया पवित्र जल उन्हें पिलाया. इसके बाद एक ऐसा चमत्कार हुआ जिसने डॉक्टरों को भी हैरान कर दिया—मरीज धीरे-धीरे पूरी तरह ठीक हो गया. भगवान वेंकटेश्वर की इस असीम कृपा से अभिभूत होकर, मन्नापल्ली परिवार ने अपनी पूरी जमीन भगवान के चरणों में अर्पित कर दी और इसी श्रद्धा से इस मंदिर की नींव पड़ी.
मंदिर को तिरुमला का ही एक लघु रूप
आज इस मंदिर को तिरुमला का ही एक लघु रूप माना जाता है. पहाड़ी पर स्थित होने के कारण यहाँ पहुँचने के लिए भक्तों को सीढ़ियाँ चढ़नी पड़ती हैं जो तिरुपति की यात्रा का अहसास कराती हैं. मंदिर परिसर में भक्तों की सुविधा के लिए 50 रुपए के सामान्य दर्शन से लेकर 300, 500 और 2500 रुपए तक के विशेष दर्शन टिकटों की व्यवस्था की गई है। दोपहर 1:30 से 2:30 बजे तक मंदिर के कपाट बंद रहते हैं. शाम के समय यहाँ की अद्भुत लाइटिंग और ठंडी हवा भक्तों को असीम मानसिक सुकून देती है.
भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर आध्यात्मिक शांति
प्रसिद्ध यादगीरगुट्टा मंदिर से महज 15 मिनट की दूरी पर स्थित स्वर्णगिरी सिर्फ एक धार्मिक स्थल नहीं, बल्कि सामाजिक सेवा का केंद्र भी बनने जा रहा है. मंदिर ट्रस्ट यहाँ जल्द ही एक आधुनिक मेडिटेशन सेंटर, वृद्धाश्रम और गौशाला जैसी सुविधाएं विकसित कर रहा है. यदि आप भी वीकेंड पर भागदौड़ भरी जिंदगी से दूर आध्यात्मिक शांति की तलाश में हैं तो स्वर्णगिरी वेंकटेश्वर मंदिर एक बेहतरीन विकल्प है.
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