पिकअप में ऊपर खीरा, नीचे बेशकीमती लकड़ी… तस्करों की नई तरकीब नाकाम, जंगलों की कटाई पर फिर उठे सवा सवाल
नरेंद्र मिश्रा, बलरामपुर
लकड़ी तस्कर अब वन विभाग की नजरों से बचने के लिए नए-नए हथकंडे अपना रहे हैं, लेकिन इस बार उनकी चालाकी काम नहीं आई। अंतरराज्यीय धनवार बैरियर पर वन विभाग की सतर्कता से एक संदिग्ध पिकअप वाहन को रोककर जांच की गई, जिसमें ऊपर खीरा लोड था, जबकि उसके नीचे बड़ी मात्रा में लकड़ी छिपाकर रखी गई थी। जांच के दौरान तस्करी का पूरा खेल सामने आ गया और वाहन को जब्त कर लिया गया।
जानकारी के अनुसार, तस्करों ने लकड़ी को छिपाने और जांच एजेंसियों को गुमराह करने के उद्देश्य से पिकअप के ऊपरी हिस्से में खीरा लोड किया था, ताकि वाहन सामान्य कृषि उपज ले जाने वाला प्रतीत हो। लेकिन बैरियर पर तैनात वन अमले को वाहन पर संदेह हुआ और जब गहन जांच की गई तो नीचे छिपाकर रखी गई लकड़ी बरामद हो गई।
वन विभाग ने वाहन को जब्त कर आगे की कार्रवाई शुरू कर दी है। फिलहाल लकड़ी की प्रजाति, मात्रा और उसके स्रोत की जांच की जा रही है। साथ ही यह भी पता लगाया जा रहा है कि लकड़ी किस जंगल क्षेत्र से काटकर लाई गई थी और इस तस्करी के पीछे कौन-कौन लोग शामिल हैं।
हालांकि, इस कार्रवाई के बाद एक बार फिर जिले में लकड़ी तस्करी को लेकर कई सवाल उठने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि वन क्षेत्रों से लकड़ी की अवैध कटाई लंबे समय से जारी है और तस्कर रोज नए तरीके अपनाकर जंगलों से लकड़ी निकालने में सफल हो जाते हैं। उनका आरोप है कि कार्रवाई तो होती है, लेकिन वह चुनिंदा मामलों तक ही सीमित रह जाती है।
ग्रामीणों का कहना है कि कई जंगलों में लगातार हो रही अवैध कटाई के कारण हरियाली तेजी से खत्म हो रही है। कई स्थानों पर अब पेड़ों की जगह केवल ठूंठ ही दिखाई देते हैं, जो वन संपदा के लगातार हो रहे नुकसान की गवाही देते हैं।
धनवार बैरियर पर हुई यह कार्रवाई भले ही वन विभाग की सतर्कता का उदाहरण हो, लेकिन इसके साथ ही यह भी संकेत देती है कि लकड़ी तस्करों के नेटवर्क अब पहले से अधिक संगठित और सक्रिय हो चुके हैं। ऐसे में जरूरत केवल एक-दो वाहनों की जब्ती तक सीमित नहीं, बल्कि अवैध कटाई से लेकर परिवहन और खरीद-फरोख्त की पूरी श्रृंखला पर सख्त निगरानी और लगातार कार्रवाई की है।

