नई दिल्ली। वैदिक ज्योतिष में राहुकाल को दिन का एक ऐसा समय माना जाता है, जिसमें शुभ और मांगलिक कार्य करने से बचने की सलाह दी जाती है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, इस अवधि में किए गए नए कार्यों में बाधाएं आने की संभावना रहती है। हालांकि, यह मान्यता ज्योतिषीय परंपराओं पर आधारित है और इसका वैज्ञानिक प्रमाण उपलब्ध नहीं है।
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क्या है राहुकाल?
वैदिक पंचांग के अनुसार, राहुकाल प्रतिदिन लगभग 90 मिनट की अवधि का होता है। इस दौरान राहु ग्रह का प्रभाव माना जाता है। राहुकाल का समय हर दिन अलग-अलग होता है, क्योंकि यह सूर्योदय और दिन की अवधि के अनुसार निर्धारित किया जाता है।
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, किसी भी दिन शुभ कार्य करने से पहले राहुकाल का समय देखना शुभ माना जाता है।
राहुकाल में शुभ कार्य क्यों नहीं किए जाते?
धार्मिक मान्यता है कि राहुकाल के दौरान शुरू किए गए शुभ और मांगलिक कार्यों में विलंब, बाधाएं या अपेक्षित सफलता न मिलने की आशंका रहती है। इसी कारण विवाह, गृह प्रवेश, नया व्यवसाय या अन्य महत्वपूर्ण कार्य इस अवधि में शुरू करने से बचने की सलाह दी जाती है।
ज्योतिष शास्त्र में राहु को एक छाया ग्रह माना गया है। मान्यता है कि यदि राहु की स्थिति प्रतिकूल हो तो व्यक्ति के जीवन में मानसिक तनाव, भ्रम और अन्य चुनौतियां बढ़ सकती हैं।
राहुकाल में किन कार्यों से बचने की दी जाती है सलाह?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार राहुकाल के दौरान निम्नलिखित कार्यों से बचना उचित माना जाता है—
- नए कार्य या व्यवसाय की शुरुआत।
- नई नौकरी ज्वाइन करना या किसी महत्वपूर्ण परियोजना की शुरुआत।
- विवाह, सगाई और अन्य मांगलिक समारोह।
- गृह प्रवेश और नए घर में प्रवेश।
- वाहन, जमीन या प्रॉपर्टी की खरीदारी।
- सोना, चांदी या अन्य कीमती आभूषणों की खरीद।
क्या रोज बदलता है राहुकाल?
हाँ। राहुकाल का समय सप्ताह के प्रत्येक दिन अलग होता है। इसका निर्धारण स्थानीय सूर्योदय के समय और दिन की कुल अवधि के आधार पर किया जाता है। इसलिए किसी भी शुभ कार्य से पहले उस दिन का पंचांग देखकर राहुकाल का समय जानने की सलाह दी जाती है।

