वर्षों से लोगों की जान लेने वाला पेण्डारी घाट बदलेगा अपनी पहचान, विधायक की पहल लाई रंग.. ‘मौत का घाट’ कहलाने वाले पेण्डारी घाट के दिन बदलेंगे? वर्षों बाद शुरू हुआ सर्वे, क्षेत्रवासियों में जगी नई उम्मीद
चंद्रिका कुशवाहा , सूरजपुर
प्रतापपुर विधानसभा का घाट पेण्डारी वर्षों से लोगों के लिए भय और दर्द का पर्याय बना हुआ है। इस मार्ग से गुजरने वाला हर चालक और यात्री दहशत के साए में सफर करता है। तीव्र ढलान, खतरनाक अंधे मोड़ और सड़क के किनारे गहरी खाई के कारण इस घाट ने अब तक न जाने कितने परिवारों की खुशियां छीन लीं। स्थानीय लोग इसे लंबे समय से “मौत का घाट” या “डेंजर घाट” के नाम से जानते हैं।
बरसात के दिनों में यहां हालात और भी भयावह हो जाते हैं। सड़क फिसलन भरी हो जाती है, दृश्यता कम हो जाती है और भारी वाहन अक्सर नियंत्रण खो बैठते हैं। कई बार बसें, ट्रक, कार और बाइक दुर्घटनाग्रस्त होकर खाई में गिर चुके हैं। अनेक लोगों की मौत हुई, जबकि दर्जनों लोग गंभीर रूप से घायल हुए। हर बड़ी दुर्घटना के बाद कुछ दिनों तक चर्चा जरूर हुई, लेकिन स्थायी समाधान नहीं निकल पाया।
इसी गंभीर स्थिति को देखते हुए क्षेत्रीय विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ने लगातार इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया। उन्होंने कई बार प्रश्नकाल में घाट पेण्डारी के सुधार और सुरक्षित निर्माण की मांग करते हुए सरकार का ध्यान आकर्षित किया। स्थानीय जनप्रतिनिधियों और क्षेत्रवासियों ने भी वर्षों तक आंदोलन, ज्ञापन और मांगपत्रों के माध्यम से इस मार्ग को सुरक्षित बनाने की मांग की।
इन प्रयासों का परिणाम अब सामने आता दिखाई दे रहा है। छत्तीसगढ़ शासन ने लोक निर्माण विभाग के मुख्य बजट वर्ष 2026-27 में इस परियोजना को शामिल किया है। इसके तहत अम्बिकापुर-धनवार-वाराणसी राज्य मार्ग (स्टेट हाईवे-2A) के किलोमीटर 68/8 स्थित घाट पेण्डारी में डीजीपीएस (DGPS) सर्वे शुरू कर दिया गया है।
लोक निर्माण विभाग (म/स) संभाग सूरजपुर की निगरानी में उपअभियंता सुधीर बड़ा की उपस्थिति में तकनीकी विशेषज्ञों द्वारा पूरे घाट का सर्वे किया जा रहा है। सर्वे रिपोर्ट के आधार पर यह तय किया जाएगा कि यहां घाट कटिंग, सड़क उन्नयन, रिटेनिंग वॉल का निर्माण किया जाए या फिर व्हायाडक्ट (ऊंचा पुल) बनाया जाए। अधिकारियों के अनुसार तकनीकी परीक्षण के बाद विस्तृत परियोजना प्रतिवेदन (DPR) तैयार कर शासन को स्वीकृति के लिए भेजा जाएगा।
विधायक शकुंतला सिंह पोर्ते ने कहा कि घाट पेण्डारी में लगातार हो रही दुर्घटनाएं उनके लिए हमेशा चिंता का विषय रही हैं। उन्होंने बताया कि मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने भी इस समस्या की गंभीरता को समझते हुए सर्वे की स्वीकृति दी है। सर्वे पूरा होने के बाद जल्द ही निर्माण कार्य की प्रशासनिक प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी।
क्षेत्रवासियों का कहना है कि यदि घाट कटिंग अथवा व्हायाडक्ट का निर्माण हो जाता है तो वर्षों से चला आ रहा दुर्घटनाओं का सिलसिला काफी हद तक रुक जाएगा। हजारों यात्रियों, किसानों, व्यापारियों और विद्यार्थियों को सुरक्षित आवागमन मिलेगा तथा प्रतापपुर, सूरजपुर और अंबिकापुर के बीच संपर्क भी अधिक सुगम होगा।
लोगों का मानना है कि यह केवल एक सड़क परियोजना नहीं, बल्कि उन सैकड़ों परिवारों की सुरक्षा से जुड़ा विषय है जिन्होंने इस घाट पर अपने परिजनों को खोया है। अब सभी की निगाहें शासन की अंतिम स्वीकृति और निर्माण कार्य शुरू होने पर टिकी हैं। यदि योजना समय पर धरातल पर उतरती है, तो वर्षों से “मौत का घाट” कहलाने वाला पेण्डारी घाट भविष्य में “सुरक्षित घाट” के रूप में अपनी नई पहचान बना सकता है।

