पीडब्ल्यूडी की बड़ी लापरवाही या घटिया निर्माण का खेल? पहली ही बारिश में बह गया लाखों का रपटा, कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश
चंद्रिका कुशवाहा, सूरजपुर
सूरजपुर जिले के प्रतापपुर विकासखंड अंतर्गत धोन्धा–गोविंदपुर–रमकोला मार्ग एक बार फिर निर्माण कार्यों की गुणवत्ता को लेकर सवालों के घेरे में आ गया है। कुछ वर्ष पहले इसी मार्ग पर करोड़ों रुपये की लागत से निर्मित पुलिया बीचों-बीच क्षतिग्रस्त होकर ढह गई थी। उस घटना के बाद निर्माण गुणवत्ता और संभावित अनियमितताओं को लेकर कई सवाल उठे थे। अब उसी मार्ग पर आवागमन बहाल करने के लिए लोक निर्माण विभाग (पीडब्ल्यूडी) द्वारा लाखों रुपये की लागत से बनाया जा रहा अस्थायी रपटा पहली ही तेज बारिश में बह जाने से विभाग की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।
पहले पुलिया टूटी, अब रपटा भी बह गया,
करोड़ों रुपये की पुलिया क्षतिग्रस्त होने के बाद धोन्धा, गोविंदपुर, रमकोला सहित दर्जनों गांवों का संपर्क प्रभावित हो गया था। ग्रामीणों, किसानों, स्कूली बच्चों और मरीजों को रोजाना भारी परेशानियों का सामना करना पड़ रहा था। लोगों की समस्या को देखते हुए शासन-प्रशासन और क्षेत्रीय विधायक की पहल पर स्थायी पुल बनने तक वैकल्पिक व्यवस्था के रूप में लगभग 45 मीटर लंबा अस्थायी रपटा बनाया जा रहा था।
ग्रामीणों का कहना है कि यह निर्माण कार्य करीब दो माह से चल रहा था। इसी दौरान कई बार निर्माण की गुणवत्ता को लेकर आपत्तियां भी उठाई गईं। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि कार्य निर्धारित तकनीकी मानकों के अनुरूप नहीं किया जा रहा था और उन्होंने समय रहते इसकी शिकायत भी की थी, लेकिन उनकी बातों को गंभीरता से नहीं लिया गया।

पहली ही बारिश में बह गया निर्माण,
बीते दिनों क्षेत्र में हुई तेज बारिश से नदी-नाले उफान पर आ गए। तेज बहाव के चलते नया बना रपटा पूरी तरह बह गया। इससे एक बार फिर दर्जनों गांवों का संपर्क टूट गया और ग्रामीणों को आवागमन में भारी कठिनाइयों का सामना करना पड़ रहा है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस निर्माण पर लाखों रुपये खर्च किए गए, वह पहली ही बारिश का सामना नहीं कर सका। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर प्रश्नचिह्न लगना स्वाभाविक है।
ग्रामीण और विभाग के दावों में विरोधाभास,
इस पूरे मामले में ग्रामीणों और पीडब्ल्यूडी विभाग के दावों में स्पष्ट विरोधाभास सामने आया है।
पीडब्ल्यूडी अधिकारियों ने जिला प्रशासन को बताया है कि रपटा निर्माण कार्य अभी पूर्ण नहीं हुआ था और निर्माणाधीन अवस्था में अचानक आई तेज बारिश के कारण वह बह गया।
वहीं दूसरी ओर ग्रामीणों का दावा है कि रपटा लगभग तैयार हो चुका था और उस पर लोगों का आवागमन भी शुरू हो गया था।
ऐसे में कई सवाल खड़े हो रहे हैं:—
यदि निर्माण अधूरा था तो लोगों के आवागमन की अनुमति क्यों दी गई?
यदि निर्माण पूरा हो चुका था तो पहली ही बारिश में उसके बह जाने की जिम्मेदारी किसकी होगी?
क्या निर्माण तकनीकी मानकों के अनुरूप किया गया था?
बरसात से पहले क्यों नहीं हुआ पूरा निर्माण?
एक बड़ा सवाल यह भी उठ रहा है कि यदि निर्माण कार्य लगभग दो माह से चल रहा था, तो मानसून शुरू होने से पहले इसे पूरा क्यों नहीं किया गया? विशेषज्ञों का मानना है कि वर्षा ऋतु में तेज बहाव वाले नदी-नालों के बीच ऐसे निर्माण कार्यों में विशेष तकनीकी सावधानी बरतनी चाहिए। ऐसे में निर्माण की योजना, समय-निर्धारण और गुणवत्ता सभी जांच के दायरे में हैं।
कलेक्टर ने दिए जांच के आदेश,
मामले की गंभीरता को देखते हुए सूरजपुर कलेक्टर रैना जमील ने कहा कि उन्हें घटना की जानकारी मिल चुकी है। उन्होंने इसे गंभीर मामला बताते हुए पीडब्ल्यूडी विभाग के अधिकारियों को तत्काल आवश्यक निर्देश दिए हैं।
कलेक्टर के अनुसार विभाग ने जानकारी दी है कि रपटा निर्माण कार्य अभी जारी था और अचानक आई तेज बारिश के कारण वह बह गया। विभाग ने दोबारा मरम्मत एवं निर्माण कराने की बात कही है।
कलेक्टर ने स्पष्ट किया कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराई जाएगी। इसके लिए जांच दल गठित कर दिया गया है और जांच रिपोर्ट के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।
जांच रिपोर्ट पर टिकीं निगाहे,
अब पूरे मामले में प्रशासनिक जांच पर सभी की निगाहें टिकी हुई हैं। यदि जांच में निर्माण कार्य में तकनीकी लापरवाही, घटिया सामग्री का उपयोग, गुणवत्ता में कमी अथवा वित्तीय अनियमितता सामने आती है तो संबंधित अधिकारियों, निर्माण एजेंसी और ठेकेदार के खिलाफ कार्रवाई की जा सकती है।
ग्रामीणों की मांग,
ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष तकनीकी जांच कर दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाए। साथ ही स्थायी और गुणवत्तापूर्ण पुल का शीघ्र निर्माण कराया जाए, ताकि हर वर्ष बारिश के दौरान लोगों को आवागमन की समस्या और सरकारी धन की बर्बादी का सामना न करना पड़े।
फिलहाल, पहले करोड़ों रुपये की पुलिया और अब लाखों रुपये का अस्थायी रपटा बह जाने से पीडब्ल्यूडी की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठ रहे हैं। अब देखना होगा कि प्रशासनिक जांच में वास्तविक जिम्मेदारी किसकी तय होती है और जनता को कब तक स्थायी समाधान मिल पाता है।

