सूरजपुर : कोरंधा पंचायत में हड़कंप: आवास, मनरेगा और फर्जी भुगतान घोटाले के आरोप, 10 हजार की कथित वसूली से लेकर फर्जी हाजिरी तक, जनदर्शन पहुंची दर्जनों ग्रामीणों की शिकायत, उच्चस्तरीय जांच की मांग, खुल सकते हैं पंचायत और जनपद स्तर के कई बड़े राज
चंद्रिका कुशवाहा, सूरजपुर
जनपद पंचायत प्रतापपुर अंतर्गत ग्राम पंचायत कोरंधा में प्रधानमंत्री आवास योजना और महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना (मनरेगा) के क्रियान्वयन को लेकर गंभीर आरोप सामने आए हैं। ग्रामीणों ने रोजगार सहायक द्वारिका गुप्ता पर प्रधानमंत्री आवास स्वीकृत कराने के नाम पर कथित रूप से 10 हजार रुपये की वसूली, मनरेगा में फर्जी हाजिरी भरकर मजदूरी राशि निकालने, पात्र श्रमिकों को रोजगार और मजदूरी से वंचित करने तथा अपने परिजनों के नाम पर संदिग्ध उपस्थिति दर्ज कराने जैसे गंभीर आरोप लगाए हैं।
मामले को लेकर दर्जनों ग्रामीणों ने कलेक्टर जनदर्शन सूरजपुर में शिकायत प्रस्तुत कर उच्चस्तरीय जांच और कठोर कार्रवाई की मांग की है। शिकायत सामने आने के बाद पंचायत स्तर पर संचालित योजनाओं की पारदर्शिता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े होने लगे हैं।
आवास स्वीकृति के नाम पर 10 हजार लेने का आरोप
शिकायतकर्ता गिरजाशंकर दुबे ने अपने आवेदन में आरोप लगाया है कि रोजगार सहायक द्वारा प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ दिलाने और आवास स्वीकृत कराने के नाम पर उनसे 10 हजार रुपये की मांग की गई थी। शिकायतकर्ता का कहना है कि आर्थिक रूप से कमजोर होने के बावजूद उसने यूपीआई के माध्यम से उक्त राशि का भुगतान किया था। अब उसने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर न्याय दिलाने की मांग की है।
लोचन यादव, दिलभरण बरगाह, मूलचंद सिंह सहित अन्य ग्रामीणों ने आरोप लगाया है कि उन्होंने मनरेगा के तहत कार्य किया, लेकिन उन्हें मजदूरी का भुगतान नहीं मिला। उनका दावा है कि उनकी जगह फर्जी हाजिरी भरकर मजदूरी राशि किसी अन्य व्यक्ति के खाते में आहरित कर ली गई।
ग्रामीणों का आरोप है कि जब वे अपनी मजदूरी की मांग करते हैं तो उन्हें कथित रूप से धमकाया जाता है और शिकायत करने पर भी भुगतान नहीं करने की बात कही जाती है।
मनरेगा रिकॉर्ड और वेबसाइट की प्रविष्टियों पर सवाल,
स्थानीय निवासियों शुभम गुप्ता और रोशन गुप्ता द्वारा प्रस्तुत दस्तावेजों के आधार पर आरोप लगाया गया है कि मनरेगा की आधिकारिक वेबसाइट में कई संदिग्ध प्रविष्टियां दर्ज हैं। शिकायतकर्ताओं का कहना है कि ऐसे लोगों के नाम पर हाजिरी दर्ज की गई है जिन्होंने वास्तविक रूप से कोई कार्य नहीं किया।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया है कि रोजगार सहायक के परिजनों और करीबी लोगों के नाम पर बड़ी संख्या में जॉब कार्ड और उपस्थिति दर्ज है, जिसकी स्वतंत्र जांच कराई जानी चाहिए।
निर्माण शुरू नहीं, फिर भी राशि आहरण की आशंका,
प्रधानमंत्री आवास योजना को लेकर भी शिकायतकर्ताओं ने गंभीर सवाल उठाए हैं। उनका आरोप है कि कुछ मामलों में निर्माण कार्य शुरू नहीं होने के बावजूद रिकॉर्ड में प्रगति दर्शाकर राशि आहरित किए जाने की आशंका है। ग्रामीणों ने इसके समर्थन में फोटो और दस्तावेज भी शिकायत के साथ प्रस्तुत किए हैं।
काम मांगने वालों को रोजगार से वंचित करने का आरोप,
ग्रामीणों का कहना है कि जो मजदूर कथित अनियमितताओं का विरोध करते हैं या फर्जी हाजिरी जैसे मामलों में सहयोग नहीं करते, उनके “डिमांड फॉर वर्क” आवेदन आगे नहीं बढ़ाए जाते। इससे पात्र श्रमिकों को रोजगार मिलने में बाधा उत्पन्न हो रही है और वे अपने वैधानिक अधिकारों से वंचित हो रहे हैं।
जनपद अधिकारियों पर भी उठे सवाल,
ग्रामीणों का कहना है कि पंचायत स्तर पर लंबे समय से शिकायतें की जा रही हैं, लेकिन जनपद पंचायत के जिम्मेदार अधिकारी इस ओर गंभीर ध्यान नहीं दे रहे हैं। आरोप है कि बार-बार शिकायतों के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होने से अनियमितताओं को बढ़ावा मिल रहा है।
उच्चस्तरीय जांच की मांग,
ग्रामीणों ने कलेक्टर से मांग की है कि कोरंधा पंचायत में मनरेगा कार्यों, मजदूरी भुगतान, फर्जी हाजिरी, प्रधानमंत्री आवास योजना में कथित वसूली और रोजगार से वंचित किए गए मजदूरों के मामलों की उच्चस्तरीय जांच कर दोषियों पर कठोर कार्रवाई की जाए। साथ ही जांच पूरी होने तक संबंधित अभिलेखों और ऑनलाइन रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए जाएं।
सीईओ ने जांच का दिया आश्वासन
इस संबंध में जनपद पंचायत प्रतापपुर के मुख्य कार्यपालन अधिकारी (सीईओ) अनिल तिवारी ने कहा कि कलेक्टर जनदर्शन में शिकायत प्राप्त हुई है। मामले की गंभीरता को देखते हुए विस्तृत जांच कराई जाएगी और जांच में जो भी दोषी पाया जाएगा उसके विरुद्ध नियमानुसार तत्काल कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल शिकायतों की सत्यता की पुष्टि जांच के बाद ही हो सकेगी, लेकिन ग्रामीणों द्वारा लगाए गए आरोपों ने पंचायत स्तर पर योजनाओं के संचालन और निगरानी व्यवस्था पर कई गंभीर प्रश्नचिह्न खड़े कर दिए हैं। अब सभी की निगाहें जिला प्रशासन की कार्रवाई पर टिकी हुई हैं।

