सूरजपुर कलेक्टर एक्शन मोड में :
राजस्व अधिकारियों की बढ़ी धड़कनें, लंबित प्रकरणों पर सख्त तेवर, समय-सीमा से बाहर मामले बर्दाश्त नहीं; हाथी प्रभावित जंगल में बनी सफलता की मिसाल ने भी खींचा ध्यान
चंद्रिका कुशवाहा, सूरजपुर
जिले में प्रशासनिक कार्यों में तेजी लाने और आम नागरिकों को समय पर राहत पहुंचाने के लिए कलेक्टर रेना जमील पूरी तरह एक्शन मोड में नजर आ रही हैं। सोमवार को आयोजित राजस्व अधिकारियों की समीक्षा बैठक में कलेक्टर ने लंबित प्रकरणों पर कड़ा रुख अपनाते हुए स्पष्ट शब्दों में कहा कि समय-सीमा से बाहर कोई भी राजस्व प्रकरण लंबित नहीं रहना चाहिए। कलेक्टर के सख्त निर्देशों के बाद अधिकारियों के बीच जवाबदेही को लेकर गंभीरता साफ दिखाई दी।
बैठक में जिले के सभी अनुविभागों और तहसीलों में लंबित राजस्व मामलों की विस्तार से समीक्षा की गई। कलेक्टर ने नामांतरण, बंटवारा, सीमांकन, अभिलेख सुधार, भू-अर्जन, पट्टा वितरण एवं अभिलेख दुरुस्तीकरण जैसे मामलों की न्यायालयवार जानकारी ली। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि आम जनता से जुड़े मामलों का त्वरित और गुणवत्तापूर्ण निराकरण सुनिश्चित किया जाए ताकि लोगों को अनावश्यक परेशानियों का सामना न करना पड़े।
कलेक्टर रेना जमील ने कहा कि प्रशासन की प्राथमिकता जनता को समय पर न्याय और राहत उपलब्ध कराना है। किसी भी स्तर पर लापरवाही या अनावश्यक विलंब स्वीकार नहीं किया जाएगा। बैठक में स्वामित्व योजना और अग्रिस्टेक पंजीयन की प्रगति की भी समीक्षा की गई तथा आवश्यक दिशा-निर्देश दिए गए। बैठक में अपर कलेक्टर, डिप्टी कलेक्टर, एसडीएम, तहसीलदार एवं अन्य राजस्व अधिकारी उपस्थित रहे।
इसी बीच जिले के विकास कार्यों की एक प्रेरणादायक तस्वीर भी सामने आई है, जिसने यह साबित कर दिया कि प्रशासनिक इच्छाशक्ति और योजनाओं के प्रभावी क्रियान्वयन से कठिन से कठिन चुनौतियों को भी अवसर में बदला जा सकता है।
प्रतापपुर जनपद पंचायत अंतर्गत ग्राम सिंघरा के निवासी करमचन्द्र की कहानी इसका जीवंत उदाहरण है। हाथी प्रभावित वनांचल क्षेत्र में वर्षों तक मिट्टी और खपरैल के जर्जर मकान में रहने वाले करमचन्द्र और उनके परिवार के लिए हर रात किसी परीक्षा से कम नहीं होती थी। एलीफेंट कॉरिडोर क्षेत्र होने के कारण हाथियों का आवागमन लगातार बना रहता था और परिवार हमेशा भय के साये में जीवन व्यतीत करता था।
प्रधानमंत्री आवास योजना (ग्रामीण) के तहत करमचन्द्र का चयन होने के बाद उनकी जिंदगी ने नया मोड़ लिया। प्रशासन, ग्राम पंचायत और जनपद पंचायत के समन्वित प्रयासों से उनका पक्का आवास निर्धारित समय-सीमा में तैयार किया गया। हाथियों की आवाजाही वाले क्षेत्र में निर्माण सामग्री पहुंचाना भी एक बड़ी चुनौती थी, लेकिन स्थानीय प्रशासन, रोजगार सहायक, पंचायत सचिव और ग्रामीणों के सहयोग से यह कार्य सफलतापूर्वक पूरा किया गया।
योजना के तहत मिली आर्थिक सहायता और मनरेगा से प्राप्त मजदूरी भुगतान ने निर्माण कार्य को गति दी। आरसीसी लिंटल और मजबूत छत वाले इस मकान के साथ स्वच्छ भारत मिशन के तहत शौचालय का निर्माण भी किया गया, जिससे परिवार की सुरक्षा और सुविधाओं में उल्लेखनीय सुधार हुआ है।
आज करमचन्द्र का परिवार अपने पक्के घर में सुरक्षित जीवन जी रहा है। हाथियों के आने की सूचना अब पहले जैसी दहशत पैदा नहीं करती। भावुक होकर करमचन्द्र कहते हैं कि सरकार ने उन्हें सिर्फ मकान नहीं दिया, बल्कि उनके परिवार को सुरक्षा, सम्मान और सुकून भरा जीवन दिया है।
एक ओर जहां कलेक्टर रेना जमील राजस्व मामलों में तेजी और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए अधिकारियों को सख्त निर्देश दे रही हैं, वहीं दूसरी ओर प्रशासन की योजनाएं धरातल पर लोगों के जीवन में सकारात्मक बदलाव भी ला रही हैं। यह दोनों तस्वीरें जिले में सुशासन, विकास और संवेदनशील प्रशासन की मिसाल बनकर सामने आई हैं।

