सूरजपुर : ज्ञान के मंदिर में मची चीख-पुकार: स्कूल बना हादसे का मैदान! पढ़ाई के बीच गिरी आकाशीय बिजली,चार छात्राएं चपेट में, दो के कपड़े तक झुलसे, स्कूल में अफरा-तफरी का माहौल, क्या सरकारी स्कूलों में सुरक्षा सिर्फ कागजों तक सीमित?

चंद्रिका कुशवाहा ,सूरजपुर
विकासखंड प्रतापपुर के माध्यमिक शाला माझापारा बैकोना में शुक्रवार दोपहर करीब 2:30 बजे उस समय अफरा-तफरी मच गई, जब कक्षाओं में पढ़ाई कर रहे बच्चों के बीच अचानक आकाशीय बिजली का असर हुआ और चार छात्राएं इसकी चपेट में आकर घायल हो गईं। घटना के बाद पूरे विद्यालय में चीख-पुकार मच गई और शिक्षक तत्काल बच्चों को सुरक्षित बाहर निकालने में जुट गए।
घटना में मनशीला (13 वर्ष), नेहा (14 वर्ष), रीना पैकरा (14 वर्ष) और राधिका (13 वर्ष) घायल हो गईं। इनमें नेहा और राधिका के कपड़े तक झुलस गए, जिससे घटना की गंभीरता का अंदाजा लगाया जा सकता है। सूचना मिलते ही डायल-112 एंबुलेंस के माध्यम से सभी घायल छात्राओं को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र प्रतापपुर पहुंचाया गया।

बीएमओ डॉ. अजीत दीवान के निर्देशन में तत्काल उपचार शुरू किया गया। ड्यूटी पर मौजूद डॉ. आफताब खान, डॉ. विकास गुप्ता सहित स्वास्थ्य विभाग की पूरी टीम ने त्वरित इलाज किया। ब्लॉक टीकाकरण नोडल अधिकारी राजेश वर्मा, विनोद रवि, प्रतिमा, अपर्णा खम्हरिया, रविशंकर, अनुमाला और नंदकिशोर भी उपचार व्यवस्था में सक्रिय रहे। चिकित्सकों के अनुसार सभी छात्राओं की स्थिति अब सामान्य है और जल्द ही उन्हें अस्पताल से छुट्टी दी जा सकती है।
इस घटना ने एक बार फिर सरकारी स्कूलों में बच्चों की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बारिश और आकाशीय बिजली जैसी प्राकृतिक आपदाओं के दौरान विद्यालयों में सुरक्षा के क्या इंतजाम हैं? क्या स्कूल परिसरों में बिजली गिरने से बचाव के लिए आवश्यक लाइटनिंग अरेस्टर (Lightning Arrestor) जैसी व्यवस्थाएं उपलब्ध हैं? यदि नहीं, तो आखिर मासूम बच्चों की सुरक्षा की जिम्मेदारी कौन लेगा?
घटना के बाद अभिभावकों में भारी चिंता और आक्रोश देखा गया। उनका कहना है कि स्कूल केवल पढ़ाई का केंद्र नहीं, बल्कि बच्चों के लिए सबसे सुरक्षित स्थान होना चाहिए। यदि कक्षा के भीतर भी बच्चे सुरक्षित नहीं हैं तो यह व्यवस्था पर गंभीर प्रश्नचिह्न है।
हालांकि स्वास्थ्य विभाग की त्वरित कार्रवाई से बड़ा हादसा टल गया, लेकिन यह घटना प्रशासन और संबंधित विभागों के लिए एक चेतावनी भी है। विशेषज्ञों का मानना है कि जिन क्षेत्रों में आकाशीय बिजली की घटनाएं अधिक होती हैं, वहां स्कूलों और सार्वजनिक भवनों में वैज्ञानिक सुरक्षा उपायों को प्राथमिकता दी जानी चाहिए।
अब सवाल यह है कि क्या इस घटना से सबक लेकर शिक्षा विभाग और सरकार स्कूलों में आवश्यक सुरक्षा उपकरणों की व्यवस्था करेगी, या फिर किसी और बड़े हादसे का इंतजार किया जाएगा? फिलहाल पूरे क्षेत्र की निगाहें प्रशासन की अगली कार्रवाई और सुरक्षा संबंधी फैसलों पर टिकी हुई हैं।

