Paper Leak Bill नई दिल्ली। लोकसभा में पेपर लीक कानून संशोधन बिल पर चर्चा के दौरान सत्ता पक्ष और विपक्ष के बीच तीखी बहस देखने को मिली। समाजवादी पार्टी के प्रमुख अखिलेश यादव ने चर्चा में हिस्सा लेते हुए केंद्र की मोदी सरकार पर जमकर निशाना साधा। उन्होंने पेपर लीक मामलों, युवाओं के आंदोलन और परीक्षा व्यवस्था को लेकर सरकार की जवाबदेही पर सवाल उठाए।
‘सरकार झुकती नहीं, झुकाने वाला चाहिए’
अखिलेश यादव ने अपने संबोधन की शुरुआत युवाओं के आंदोलन के जिक्र से की। उन्होंने कहा कि वह आंदोलन को काफी दूर से देख रहे थे। उनके मुताबिक आंदोलन के दौरान युवाओं ने संदेश दिया कि सरकार भी झुकती है, बस झुकाने वाला चाहिए।
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उन्होंने कहा कि युवाओं के आंदोलन के बाद सरकार को झुकना पड़ा और इसे नई पीढ़ी की बड़ी उपलब्धि बताया।
धर्मेंद्र प्रधान को लेकर साधा निशाना
सपा प्रमुख ने पूर्व केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान को लेकर भी सरकार पर निशाना साधा। उन्होंने कहा कि करोड़ों युवाओं की मांग थी कि प्रधान इस्तीफा दें और अब वह मंत्री नहीं हैं।
अखिलेश यादव ने तंज कसते हुए कहा कि एक ‘प्रधान’ को हटाकर प्रधानमंत्री को बचा लिया गया। उन्होंने कहा कि उन्हें किसी के स्वागत से समस्या नहीं है, लेकिन सरकार को यह बताना चाहिए कि परीक्षा व्यवस्था में हुई गड़बड़ियों की जिम्मेदारी किसकी है।
‘जो चढ़ावा नहीं बचा सके, पेपर लीक कैसे बचाएंगे?’
पेपर लीक के मुद्दे पर अखिलेश यादव ने सरकार पर तीखा हमला करते हुए कहा कि “जो लोग चढ़ावा नहीं बचा सके, वो लोग पेपर लीक कैसे बचा पाएंगे।”
उन्होंने राम मंदिर में चढ़ावे से जुड़ी कथित गड़बड़ी का हवाला देते हुए सरकार पर लोगों की आंखों में धूल झोंकने का आरोप लगाया।
20 लाख अभ्यर्थियों का किया जिक्र
अखिलेश यादव ने कहा कि अगर करीब 20 लाख बच्चों ने परीक्षा दी और एक परिवार में औसतन पांच लोग मानें, तो इसका प्रभाव करीब एक करोड़ लोगों तक पहुंचता है। उन्होंने कहा कि पेपर लीक केवल परीक्षा देने वाले छात्रों का मुद्दा नहीं, बल्कि उनके पूरे परिवार और भविष्य से जुड़ा विषय है।
उन्होंने युवाओं और उनके अभिभावकों द्वारा किए गए आंदोलनों का भी उल्लेख किया और कहा कि नई पीढ़ी ने सरकार को अपनी मांगों के सामने झुकने के लिए मजबूर किया।
NTA और आउटसोर्सिंग पर भी सवाल
अखिलेश यादव ने परीक्षा व्यवस्था में NTA (नेशनल टेस्टिंग एजेंसी) की भूमिका पर भी सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि सरकार को यह स्पष्ट करना चाहिए कि NTA में कौन लोग जिम्मेदार थे और परीक्षा से जुड़े कथित घोटालों में किसकी भूमिका थी।
उन्होंने आउटसोर्सिंग को लेकर भी सरकार पर तंज कसा और कहा कि उन्हें डर है कि कहीं ऐसा न हो कि पूरी सरकार ही आउटसोर्स कर दी जाए।

