Monsoon Health Tips : बारिश का मौसम जहां गर्मी से राहत देता है, वहीं अपने साथ कई तरह की स्वास्थ्य संबंधी समस्याएं भी लेकर आता है। मानसून के दौरान वातावरण में नमी बढ़ने से बैक्टीरिया, वायरस और फंगस तेजी से पनपते हैं। ऐसे में खान-पान में थोड़ी सी लापरवाही भी फूड पॉइजनिंग, पेट के संक्रमण, एसिडिटी और पाचन संबंधी समस्याओं का कारण बन सकती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि इस मौसम में बाहर के खाने से जितना हो सके परहेज करना चाहिए।
विशेषज्ञों के अनुसार मानसून में शरीर की पाचन क्षमता सामान्य दिनों की तुलना में कमजोर हो जाती है। आयुर्वेद के अनुसार इस मौसम में वात, पित्त और कफ तीनों दोष प्रभावित होते हैं। इसके कारण गैस, एसिडिटी, जोड़ों में दर्द, सर्दी-खांसी और पेट से जुड़ी समस्याएं बढ़ सकती हैं। इसलिए इस मौसम में हल्का, ताजा और आसानी से पचने वाला भोजन करना सबसे बेहतर माना जाता है।
बारिश के मौसम में सड़क किनारे मिलने वाले पकौड़े, समोसे, कचौड़ी, चाट, गोलगप्पे और अन्य तले-भुने खाद्य पदार्थ खाने से बचना चाहिए। खुले में बिकने वाले खाद्य पदार्थों में संक्रमण का खतरा अधिक रहता है। ऐसे भोजन से फूड पॉइजनिंग, गैस, अपच और पेट खराब होने की आशंका बढ़ जाती है।
स्वास्थ्य विशेषज्ञ मानसून के दौरान मांसाहारी भोजन और विशेष रूप से सी-फूड का सेवन भी सीमित करने की सलाह देते हैं। अधिक नमी के कारण इन खाद्य पदार्थों में बैक्टीरिया तेजी से पनप सकते हैं, जिससे फूड इंफेक्शन का खतरा बढ़ जाता है। यदि नॉन-वेज का सेवन करें तो उसकी ताजगी और अच्छी तरह पकने का विशेष ध्यान रखें।
इसके अलावा ठंडे पेय, आइसक्रीम और फ्रिज में रखा ठंडा भोजन भी इस मौसम में नुकसान पहुंचा सकता है। इसके बजाय गुनगुना पानी, हर्बल टी, अदरक का पानी या गर्म सूप का सेवन करना बेहतर माना जाता है, जिससे पाचन तंत्र मजबूत रहता है।
मानसून में अधिक मसालेदार भोजन भी पाचन संबंधी परेशानियों को बढ़ा सकता है। साथ ही पत्तेदार सब्जियां और बाहर मिलने वाला कटा हुआ सलाद भी सावधानी से खाना चाहिए, क्योंकि इनमें बैक्टीरिया और कीटाणु होने की संभावना रहती है। घर पर अच्छी तरह धोकर और ताजा तैयार किया गया भोजन ही सुरक्षित माना जाता है।
विशेषज्ञ सलाह देते हैं कि बारिश के मौसम में ताजा, हल्का और स्वच्छ भोजन करें, पर्याप्त मात्रा में गर्म या उबला हुआ पानी पिएं तथा बाहर के खुले खाद्य पदार्थों से बचें। इससे फूड इंफेक्शन और मौसमी बीमारियों का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है।

