मुंबई। देश के दिग्गज उद्योगपति मुकेश अंबानी के रिलायंस ग्रुप ने मुंबई में झुग्गी पुनर्विकास सेक्टर में बड़ा कदम रखते हुए पश्चिमी मुंबई स्थित 101.4 एकड़ के जुहू गली स्लम क्लस्टर के रीडेवलपमेंट की बोली जीत ली है। हालांकि इस खबर की स्वतंत्र पुष्टि अभी नहीं हो सकी है।
रॉयटर्स की रिपोर्ट के अनुसार, मुंबई की स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी (SRA) ने बुधवार देर रात जानकारी दी कि रिलायंस 4IR रियल्टी प्राइवेट लिमिटेड के नेतृत्व वाले कंसोर्टियम ने अंधेरी स्थित इस बड़े प्रोजेक्ट के लिए सफल बोली लगाई है। इस परियोजना के तहत यहां रहने वाले पात्र लोगों के लिए 28,000 से अधिक पुनर्वास घर बनाए जाने की योजना है।
इस टेंडर में अन्य बड़े कारोबारी समूहों ने भी हिस्सा लिया था, जिनमें JSW ग्रुप और शापूरजी पलोनजी ग्रुप प्रमुख रहे। इससे साफ है कि मुंबई के स्लम रीडेवलपमेंट सेक्टर में अब बड़े कॉर्पोरेट घरानों की दिलचस्पी तेजी से बढ़ रही है।
गौरतलब है कि मुंबई में पहले झुग्गी पुनर्विकास का काम छोटे और मध्यम डेवलपर्स के जरिए किया जाता था, लेकिन जमीन के मालिकाना हक और निवासियों की सहमति जैसी जटिलताओं के कारण प्रोजेक्ट में देरी आम बात थी। हाल के वर्षों में महाराष्ट्र सरकार द्वारा किए गए नीतिगत बदलावों के बाद बड़े समूहों की भागीदारी बढ़ी है।
नवंबर 2025 में राज्य सरकार ने नया रीडेवलपमेंट फ्रेमवर्क लागू किया, जिसके तहत डेवलपर्स को कम से कम 50 एकड़ की जुड़ी हुई जमीन पर बिना निवासियों की अनिवार्य सहमति के काम करने की अनुमति दी गई है। साथ ही अतिरिक्त डेवलपमेंट राइट्स और ऊंची इमारतों की अनुमति देकर परियोजनाओं को व्यावसायिक रूप से आकर्षक बनाया गया है।
जुहू गली प्रोजेक्ट के तहत रिलायंस को अगले दो वर्षों में करीब 7 अरब रुपये का भुगतान स्लम रिहैबिलिटेशन अथॉरिटी को करना होगा, जिससे निवासियों के अस्थायी किराए की व्यवस्था की जा सके। इसके अलावा एक वर्ष के अतिरिक्त किराए का खर्च और 1 अरब रुपये की परफॉर्मेंस गारंटी भी जमा करनी होगी।
SRA ने अपने बयान में कहा कि इस सफल बोली प्रक्रिया से यह स्पष्ट होता है कि देश के बड़े कॉर्पोरेट घराने सरकार के साथ मिलकर मुंबई में आवासीय चुनौतियों के समाधान में सक्रिय भूमिका निभाने को तैयार हैं।
उल्लेखनीय है कि इससे पहले 2023 में अडानी ग्रुप ने एशिया की सबसे बड़ी झुग्गी बस्तियों में शामिल धारावी के पुनर्विकास का ठेका हासिल किया था। हालांकि इस परियोजना को कानूनी अड़चनों और स्थानीय निवासियों के विरोध जैसी चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है।

