Iran-US Conflict : नई दिल्ली। मिडिल ईस्ट में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है। अमेरिकी सेना ने ईरान के खिलाफ बड़े पैमाने पर सैन्य कार्रवाई करते हुए 80 से अधिक सैन्य ठिकानों पर हमले किए हैं। अमेरिकी सैन्य बल CENTCOM (यूएस सेंट्रल कमांड) ने पुष्टि की है कि यह कार्रवाई ईरान द्वारा होर्मुज जलडमरूमध्य (Strait of Hormuz) से गुजर रहे तीन वाणिज्यिक जहाजों पर हुए हमलों के जवाब में की गई।
अमेरिका का कहना है कि ईरान ने हालिया युद्धविराम (सीजफायर) का उल्लंघन करते हुए अंतरराष्ट्रीय समुद्री व्यापार को निशाना बनाया, जिसके बाद यह जवाबी सैन्य अभियान चलाया गया।
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किन ठिकानों को बनाया गया निशाना?
CENTCOM के अनुसार, हमलों में ईरान की कई महत्वपूर्ण सैन्य क्षमताओं को निशाना बनाया गया, जिनमें शामिल हैं—
- एयर डिफेंस सिस्टम
- कमांड एंड कंट्रोल नेटवर्क
- तटीय रडार और निगरानी प्रणाली
- सतह से हवा में मार करने वाली मिसाइल प्रणाली
- एंटी-शिप मिसाइल क्षमताएं
- ड्रोन लॉन्च साइट
- होर्मुज क्षेत्र में मौजूद 60 से अधिक रिवोल्यूशनरी गार्ड्स की छोटी नौकाएं
दक्षिणी ईरान के सिरीक, केशम और बंदर अब्बास क्षेत्रों में धमाकों की खबरें सामने आई हैं। हालांकि, नुकसान और हताहतों की आधिकारिक पुष्टि अभी तक नहीं हुई है।
अमेरिका का दावा
अमेरिका ने कहा कि उसका उद्देश्य व्यापक युद्ध छेड़ना नहीं, बल्कि अंतरराष्ट्रीय समुद्री मार्गों की सुरक्षा सुनिश्चित करना और भविष्य में ऐसे हमलों को रोकना है। वॉशिंगटन ने ईरान पर अंतरराष्ट्रीय कानूनों और युद्धविराम समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाया है।
ईरान की कड़ी प्रतिक्रिया
हमलों के बाद ईरान ने अमेरिका पर शांति समझौते के उल्लंघन का आरोप लगाते हुए चेतावनी दी है कि वह अपनी संप्रभुता और राष्ट्रीय हितों की रक्षा के लिए उचित जवाब देगा। ईरानी अधिकारियों ने अमेरिकी कार्रवाई को “आक्रामक कदम” बताया है

