India UAE Power Cable : नई दिल्ली। भारत और संयुक्त अरब अमीरात (UAE) के बीच ऊर्जा क्षेत्र में सहयोग को नई ऊंचाई देने के लिए 1,600 किलोमीटर लंबी अंडरसी पावर केबल बिछाने की महत्वाकांक्षी परियोजना पर विचार किया जा रहा है। केंद्रीय ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने ‘इंडिया एनर्जी स्टोरेज वीक’ के दौरान बताया कि इस परियोजना की अनुमानित लागत 40,000 करोड़ रुपये होगी।
यह परियोजना प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “वन सन, वन वर्ल्ड, वन ग्रिड (OSOWOG)” विज़न का अहम हिस्सा मानी जा रही है, जिसका उद्देश्य देशों के बीच बिजली कनेक्टिविटी बढ़ाना और स्वच्छ ऊर्जा के वैश्विक उपयोग को प्रोत्साहित करना है।
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1600 किलोमीटर लंबी होगी अंडरसी केबल
प्रस्तावित परियोजना के तहत करीब 1,600 किलोमीटर लंबी हाई-वोल्टेज डायरेक्ट करंट (HVDC) पावर केबल समुद्र के भीतर बिछाई जाएगी। यह केबल संयुक्त अरब अमीरात के तट को गुजरात के भुज से जोड़ेगी।
परियोजना के माध्यम से 2 गीगावाट बिजली का ट्रांसमिशन किया जा सकेगा। केबल को 3,000 से 3,500 मीटर की समुद्री गहराई में बिछाने की योजना है। इस महत्वाकांक्षी परियोजना को सरकारी कंपनी पावर ग्रिड कॉर्पोरेशन ऑफ इंडिया लागू करेगी और इसे पूरा होने में लगभग 5 से 6 वर्ष लग सकते हैं।
वैश्विक बिजली कनेक्टिविटी पर भारत का फोकस
ऊर्जा मंत्री मनोहर लाल खट्टर ने कहा कि भारत केवल UAE ही नहीं, बल्कि कई अन्य देशों के साथ भी अंतरराष्ट्रीय बिजली ग्रिड विकसित करने की दिशा में काम कर रहा है।
उन्होंने बताया कि सऊदी अरब के साथ भी 47,000 करोड़ रुपये की लागत वाली अंडरसी पावर केबल परियोजना पर समझौता हो चुका है। इसके अलावा भविष्य में श्रीलंका, सिंगापुर और यूरोप तक बिजली ग्रिड नेटवर्क का विस्तार करने की योजना है।
नवीकरणीय ऊर्जा निर्यात का मिलेगा अवसर
इस परियोजना के पूरा होने के बाद भारत अपनी घरेलू जरूरतों को पूरा करने के बाद अतिरिक्त सौर और पवन ऊर्जा खाड़ी देशों को निर्यात कर सकेगा। अलग-अलग टाइम ज़ोन का लाभ उठाते हुए बिजली का आदान-प्रदान भी अधिक प्रभावी ढंग से किया जा सकेगा।

