Last Updated:June 01, 2026, 12:05 IST
सहारनपुर का उद्यान विभाग केंद्र जहां पर लगातार पौधों पर रिसर्च होता है और कुछ साल पहले यहां पर एक आम के पेड़ पर रिसर्च कर ग्राफ्टिंग के माध्यम से उसको इस तरीके से तैयार किया गया था कि उस एक पेड़ के ऊपर 121 प्रकार के आम आते थे. लेकिन आज उस आम के पेड़ पर एक भी आम नहीं है जो की किया गया आविष्कार लापरवाही की भेंट चढ़ चुका है.
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सहारनपुरः आम का सीजन शुरू हो चुका है और आम की खुशबू, आम का स्वाद, आम का मिठास सहारनपुर से ज्यादा शायद कहीं और आपको देखने और खाने को ना मिले. सहारनपुर जनपद जिसकों मैंगो बेल्ट के नाम से जाना जाता है. यहां का लंगड़ा, चौसा और दसहरी आम भारत देश ही नहीं बल्कि विदेशों तक अपने मिठास छोड़ता है. इसके अलावा यहां पर प्रत्येक वर्ष आम की नए प्रजातियों को विकसित भी किया जाता है.
आम के पेड़ पर 121 प्रकार के आम
सहारनपुर का उद्यान विभाग केंद्र जहां पर लगातार पौधों पर रिसर्च होता है और कुछ साल पहले यहां पर एक आम के पेड़ पर रिसर्च कर ग्राफ्टिंग के माध्यम से उसको इस तरीके से तैयार किया गया था कि उस एक पेड़ के ऊपर 121 प्रकार के आम आते थे. कंपनी बाग स्थित औद्यानिक प्रयोग एवं प्रशिक्षण केंद्र में एक ही आम के पेड़ पर 121 अलग-अलग किस्में उगाने का यह अनोखा प्रयोग 2016 में शुरू किया गया था. यह कोई प्राकृतिक आविष्कार नहीं, बल्कि ग्राफ्टिंग (कलम लगाने की तकनीक) द्वारा किया गया एक सफल वैज्ञानिक शोध था.
इस पेड़ पर आम की कुछ खास किस्म की वैरायटी जैसे आम्रपाली, जहांगीर, हिमसागर, तोतापुरी, अल्फांसो, जमादार, टॉमी एट किंग्स, पूसा सूर्या, रटौल, सहारनपुर की वैरायटी अरुण, वरुण, सौरभ, गौरव सहित लखनऊ की फेमस वैरायटी भी लगती थी. जिनको देखने के लिए हर वर्ष दूर-दूर से लोग देखने के लिए आते थे. जहां पिछले कई सालों से यह पेड़ लोगों के आकर्षण का केंद्र बना हुआ था वही इस वर्ष इस पेड़ पर 121 तो दूर आम की एक वैरायटी भी नहीं आई. इसे लापरवाही कहे या फिर बदलाव यह कहना बड़ा ही मुश्किल है.
अब बन गया घूमने की जगह
जहां पहले कभी यह रिसर्च सेंटर केवल रिसर्च के लिए जाना जाता था. लेकिन धीरे-धीरे यह सिर्फ लोगों के घूमने का स्थान बन गया. यहां पर सुबह शाम हजारों लोगों की भीड़ इसमें टहलने के लिए आती है. लेकिन रिसर्च के नाम पर अब ज्यादा कुछ देखने को नहीं मिलता. जबकि भारत देश में सबसे पहले चाय का पेड़ भी यहीं पर आया था. सहारनपुर का यह उद्यान विभाग केंद्र भारत के सबसे पुराने और प्रमुख उद्यानों में से एक है. अब देखने वाली बात यह है कि क्या इस आम के पेड़ की फिर से देखरेख कर इस पर आने वाले फलों को दोबारा से लाया जा सकता है या फिर सहारनपुर का यह अनोखा आविष्कार अब शायद ही लोगों को देखने को मिले.
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मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
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