कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने किया स्वागत, कहा- दोषियों पर होगी कड़ी कार्रवाई; सैकड़ों किसानों को मिली राहत, खाद-बीज वितरण फिर शुर
रायपुर/अंबिकापुर।
सरगुजा संभाग के जिला सहकारी केंद्रीय बैंक मर्यादित अंबिकापुर की शंकरगढ़, कुसमी और रामानुजगंज शाखाओं में सामने आई 30 करोड़ 51 लाख रुपये से अधिक की वित्तीय अनियमितता के मामले में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) ने जांच शुरू कर दी है। किसानों की लगातार शिकायतों और मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच एजेंसी की सक्रियता से क्षेत्र के हजारों किसानों में न्याय की उम्मीद जगी है।

सरगुजा संभाग के विभिन्न क्षेत्रों में किसानों के नाम पर बड़ी संख्या में किसान क्रेडिट कार्ड (केसीसी) ऋण स्वीकृत किए जाने और वित्तीय गड़बड़ियों की शिकायतें लंबे समय से सामने आ रही थीं। इस संबंध में लगभग 500 किसानों ने शिकायत दर्ज कराई थी। किसानों का आरोप था कि उनके नाम पर बिना जानकारी के ऋण प्रकरण तैयार किए गए तथा बैंकिंग प्रक्रियाओं में गंभीर अनियमितताएं बरती गईं।
मामले को लेकर प्रदेश के कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने ईडी जांच का स्वागत करते हुए कहा कि राज्य सरकार वित्तीय अनियमितताओं के मामलों में जीरो टॉलरेंस की नीति पर काम कर रही है। उन्होंने कहा कि सहकारी संस्थाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करना सरकार की प्राथमिकता है और दोषी पाए जाने वाले अधिकारियों एवं कर्मचारियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।सरकार द्वारा की गई कार्रवाई के बाद सहकारी बैंक की संबंधित शाखाओं में खाद एवं बीज वितरण व्यवस्था को पुनः सुचारु किया गया है, जिससे सैकड़ों किसानों को राहत मिली है। वहीं वित्तीय अनियमितताओं में संलिप्त अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के साथ विभागीय कार्रवाई भी प्रारंभ की गई है।
गौरतलब है कि हाल ही में बलरामपुर जिले के रामानुजगंज क्षेत्र में किसानों ने अपनी शिकायतों पर समय पर कार्रवाई नहीं होने का आरोप लगाते हुए अनिश्चितकालीन धरना-प्रदर्शन की चेतावनी दी थी। किसानों का कहना था कि लंबे समय से शिकायतों के बावजूद जिम्मेदार विभागों द्वारा प्रभावी कार्रवाई नहीं की जा रही थी।इधर बैंक घोटाले से जुड़े मामलों में बलरामपुर पुलिस भी सक्रिय रही है। बलरामपुर के तत्कालीन पुलिस अधीक्षक वैभव बैंकर के निर्देशन में भी इस प्रकरण से जुड़े मामलों में महत्वपूर्ण कार्रवाई की गई थी, जिसके बाद जांच को और गति मिली।ईडी की जांच शुरू होने के बाद अब किसानों को उम्मीद है कि करोड़ों रुपये की इस कथित वित्तीय अनियमितता का पूरा सच सामने आएगा और जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कठोर कानूनी कार्रवाई होगी।

