बिलासपुर। छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने एक महत्वपूर्ण फैसले में कहा है कि सरकारी या रेलवे की जमीन से किसी भी कथित अवैध कब्जाधारी को हटाने से पहले कानून के अनुसार स्पष्ट कारणों वाला नोटिस देना अनिवार्य है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि बिना उचित कारण बताए जारी किया गया नोटिस प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप नहीं माना जा सकता।
इसी के साथ हाईकोर्ट ने दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे (SECR) द्वारा जिला अदालत के फैसले को चुनौती देने वाली रिट याचिका खारिज कर दी और जिला कोर्ट के आदेश को बरकरार रखा।
क्या है मामला?
मामला बिलासपुर के बुधवारी बाजार निवासी एक व्यक्ति से जुड़ा है, जिसे दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने रेलवे की जमीन पर अवैध कब्जाधारी बताते हुए लोक परिसर (अनधिकृत कब्जाधारियों की बेदखली) अधिनियम, 1971 के तहत बेदखल करने का आदेश जारी किया था।
इस आदेश के खिलाफ संबंधित व्यक्ति ने जिला अदालत में अपील दायर की थी। 15 मई 2026 को जिला कोर्ट ने अपील स्वीकार करते हुए रेलवे के बेदखली आदेश को निरस्त कर दिया और मामले को दोबारा सक्षम अधिकारी के पास भेज दिया।
जिला कोर्ट ने दिए थे ये निर्देश
जिला अदालत ने अपने आदेश में कहा था कि रेलवे अधिनियम की धारा-4 के तहत संबंधित व्यक्ति को स्पष्ट और विधिसम्मत नोटिस जारी किया जाए तथा उसके बाद कानून के अनुरूप नए सिरे से निर्णय लिया जाए।
जिला कोर्ट के इस फैसले को दक्षिण पूर्व मध्य रेलवे ने हाईकोर्ट में चुनौती दी थी।
रेलवे ने क्या दलील दी?
रेलवे की ओर से अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल रमाकांत मिश्रा ने अदालत में कहा कि कब्जाधारी को धारा-4 के तहत विधिवत नोटिस दिया गया था और उसे अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर भी मिला था। बावजूद इसके उसने कोई साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किया। रेलवे का तर्क था कि मामले को फिर से सक्षम अधिकारी के पास भेजने से केवल अनावश्यक देरी होगी।
हाईकोर्ट ने क्यों खारिज की याचिका?
हाईकोर्ट ने रिकॉर्ड और जिला अदालत के आदेश का विस्तृत परीक्षण करने के बाद पाया कि रेलवे द्वारा जारी शुरुआती नोटिस में बेदखली के आधार और कारणों का स्पष्ट उल्लेख नहीं था। ऐसे में नोटिस कानून की आवश्यकताओं को पूरा नहीं करता।
अदालत ने कहा कि भले ही संबंधित व्यक्ति अपने पक्ष में कोई साक्ष्य प्रस्तुत न कर पाया हो, लेकिन प्राकृतिक न्याय का मूल सिद्धांत यह है कि किसी भी दंडात्मक कार्रवाई से पहले संबंधित व्यक्ति को स्पष्ट कारणों सहित वैध नोटिस दिया जाना आवश्यक है।

