मुंबई। देश में मंदिरों में चढ़ावे और दान की कथित चोरी को लेकर चल रही सियासी बहस के बीच महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (MNS) प्रमुख राज ठाकरे ने मुंबई के प्रसिद्ध सिद्धिविनायक मंदिर को लेकर बड़ा दावा किया है। राज ठाकरे ने आरोप लगाया कि मंदिर में हर साल करीब 18 करोड़ रुपये के दान की कथित हेराफेरी हो रही है।
राज ठाकरे ने यह दावा 1 अगस्त को मुंबई में MNS की छात्र इकाई की 20वीं वर्षगांठ के कार्यक्रम के दौरान किया। उन्होंने कहा कि मंदिरों में आने वाला चढ़ावा श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा है और इसकी व्यवस्था में पारदर्शिता जरूरी है। उनके बयान के बाद महाराष्ट्र की राजनीति में एक बार फिर मंदिरों के चढ़ावे को लेकर बहस तेज हो गई है।
राज ठाकरे ने क्या आरोप लगाए?
MNS प्रमुख ने दावा किया कि सिद्धिविनायक मंदिर की दान पेटी से हर साल करीब 18 करोड़ रुपये कथित तौर पर हड़प लिए जाते हैं। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि मंदिर के कुछ कर्मचारियों की कथित भूमिका को लेकर सवाल उठे हैं।
राज ठाकरे के मुताबिक, मंदिर ट्रस्ट के 8 ट्रस्टियों ने महाराष्ट्र के उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे को पत्र लिखकर कथित वित्तीय अनियमितताओं की जांच की मांग की है। उन्होंने इसी पत्र का हवाला देते हुए मामले की जांच की मांग उठाई।
हालांकि, 18 करोड़ रुपये की कथित चोरी का आरोप अभी राज ठाकरे के दावे के स्तर पर है और इसकी स्वतंत्र पुष्टि या किसी जांच में दोष सिद्ध होने की जानकारी सामने नहीं आई है।
राम मंदिर को लेकर भी किया बड़ा दावा
राज ठाकरे ने अपने संबोधन में अयोध्या के राम मंदिर से जुड़े दान को लेकर भी आरोप लगाए। उन्होंने दावा किया कि वहां 1,400 करोड़ रुपये की चोरी हुई है।
उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से मंदिरों में चढ़ावे और दान की कथित अनियमितताओं पर सार्वजनिक रूप से बात करने की मांग की। राज ठाकरे ने कहा कि श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मंदिरों में वित्तीय पारदर्शिता सुनिश्चित की जानी चाहिए।
राम मंदिर से जुड़े वित्तीय मामलों पर पहले भी राजनीतिक आरोप-प्रत्यारोप होते रहे हैं। वहीं, मंदिर से संबंधित कथित चांदी की गड़बड़ी को लेकर जांच में SIT ने कहा था कि दान में मिली चांदी की अधिकांश सामग्री चोरी नहीं हुई थी, बल्कि उसे पिघलाने या मिंटिंग के लिए भेजे जाने की बात सामने आई थी।
सिद्धिविनायक पर पहले भी उठ चुके हैं सवाल
सिद्धिविनायक मंदिर में दान और कथित अनियमितताओं का मुद्दा महाराष्ट्र की राजनीति में पहले भी उठ चुका है। जुलाई में उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे ने विधानसभा में मंदिर से जुड़े कथित अनियमितताओं को लेकर तत्कालीन सरकार पर सवाल उठाए थे।
अब राज ठाकरे के ताजा आरोपों के बाद यह मुद्दा फिर राजनीतिक बहस के केंद्र में आ गया है।
बीजेपी विधायक ने जताई आपत्ति
राज ठाकरे के आरोपों पर भाजपा की ओर से भी प्रतिक्रिया सामने आई है। भाजपा विधायक ने गणेश मंदिर को लेकर इस तरह के आरोप लगाए जाने पर आपत्ति जताते हुए कहा कि सिद्धिविनायक जैसे आस्था के केंद्र के बारे में बिना ठोस आधार के आरोप लगाना उचित नहीं है।
ऐसे में अब इस मुद्दे पर महाराष्ट्र में सत्तापक्ष और विपक्ष के बीच सियासी बयानबाजी और तेज होने के आसार हैं।
जांच से ही साफ होगी आरोपों की सच्चाई
राज ठाकरे के दावे के बाद सबसे बड़ा सवाल यही है कि क्या सिद्धिविनायक मंदिर में वास्तव में हर साल 18 करोड़ रुपये की हेराफेरी हुई है?
इसकी वास्तविक स्थिति जांच, मंदिर ट्रस्ट के वित्तीय रिकॉर्ड, ऑडिट और संबंधित दस्तावेजों की पड़ताल के बाद ही स्पष्ट होगी। फिलहाल राज ठाकरे ने आरोपों की जांच की मांग करते हुए सरकार से इस पूरे मामले में पारदर्शिता बरतने की अपील की है।

