न्यायाधीश और फॉरेंसिक विशेषज्ञों ने बताया—एक छोटी चूक भी आरोपी को दिला सकती है राहत, वैज्ञानिक साक्ष्य और कानूनी प्रक्रिया पर दिया विशेष प्रशिक्षण..
चंद्रिका कुशवाहा,सूरजपुर
अपराधियों को सजा दिलाने और गंभीर अपराधों की विवेचना को और अधिक मजबूत बनाने के उद्देश्य से शनिवार को जिला पंचायत सभाकक्ष में एक दिवसीय विशेष कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला में हत्या, दुष्कर्म, एनडीपीएस, पॉक्सो सहित अन्य गंभीर अपराधों की विवेचना के दौरान बरती जाने वाली कानूनी सावधानियों, वैज्ञानिक साक्ष्य संकलन और नवीन आपराधिक कानूनों की बारीकियों पर पुलिस अधिकारियों और विवेचकों को विस्तार से प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यशाला का शुभारंभ प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती विनीता वार्नर ने किया। इस अवसर पर अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मानवेन्द्र सिंह, डीआईजी एवं एसएसपी प्रशांत कुमार ठाकुर, डीडीपी वीरेन्द्र लकड़ा, डीपीओ मनोज चतुर्वेदी सहित न्यायिक एवं पुलिस विभाग के वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे।
प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश श्रीमती विनीता वार्नर ने कहा कि विवेचना में की गई एक छोटी सी प्रक्रियात्मक त्रुटि भी आरोपी को कानूनी लाभ दिला सकती है। इसलिए एफआईआर दर्ज होने से लेकर चालान पेश करने तक प्रत्येक चरण में कानून के अनुरूप कार्रवाई, मजबूत साक्ष्य संकलन और डिजिटल साक्ष्यों के संरक्षण पर विशेष ध्यान देना आवश्यक है। उन्होंने बताया कि सात वर्ष या उससे अधिक सजा वाले अपराधों में फॉरेंसिक जांच अब अत्यंत महत्वपूर्ण और कई मामलों में अनिवार्य प्रक्रिया का हिस्सा है।
अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश मानवेन्द्र सिंह ने विशेष रूप से एनडीपीएस एक्ट के मामलों में जांच के दौरान होने वाली सामान्य त्रुटियों की जानकारी देते हुए कहा कि जानकारी के अभाव में कई मामलों में अभियोजन कमजोर पड़ जाता है, जिसका लाभ आरोपी उठा लेते हैं। उन्होंने विवेचकों को कानूनी चेकलिस्ट के साथ अनुसंधान करने और प्रत्येक प्रक्रिया का विधिवत पालन करने की सलाह दी।
कार्यशाला में संयुक्त संचालक एफएसएल आर.के. पैंकरा, कुलदीप कुजूर एवं डॉ. रसलीन कौर ने घटनास्थल से वैज्ञानिक तरीके से साक्ष्य संकलन, फिंगर प्रिंट, डीएनए, डिजिटल साक्ष्य तथा अन्य तकनीकी पहलुओं पर विस्तार से जानकारी दी। उन्होंने बताया कि घटनास्थल पर दिखाई देने वाले छोटे-छोटे सुराग भी अपराधी तक पहुंचने का सबसे मजबूत माध्यम बन सकते हैं।
डीआईजी एवं एसएसपी प्रशांत कुमार ठाकुर ने कहा कि कार्यशाला का उद्देश्य विवेचकों को कानूनी और तकनीकी रूप से अधिक सक्षम बनाना है, ताकि जांच की गुणवत्ता बढ़े, पीड़ितों को समय पर न्याय मिले और दोषियों को अदालत से सजा सुनिश्चित हो सके। उन्होंने ई-साक्ष्य प्रणाली के प्रभावी उपयोग, तकनीक आधारित विवेचना तथा मजबूत अभियोग पत्र तैयार करने पर भी विशेष जोर दिया।
कार्यक्रम का संचालन निरीक्षक जावेद मियादाद ने किया। इस दौरान अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक योगेश देवांगन, सीएसपी बेनार्ड कुजूर, विभिन्न एसडीओपी, डीएसपी, थाना एवं चौकी प्रभारी सहित जिले के 145 विवेचक उपस्थित रहे।
पुलिस अधिकारियों का मानना है कि इस प्रशिक्षण से गंभीर अपराधों की विवेचना में गुणवत्ता आएगी, वैज्ञानिक साक्ष्य मजबूत होंगे और अदालत में अभियोजन पक्ष पहले से अधिक प्रभावी ढंग से दोषियों के खिलाफ अपना पक्ष रख सकेगा, जिससे अपराधियों को सजा दिलाने की संभावना और मजबूत होगी।

