पारंपरिक वैद्यों को स्वास्थ्य विभाग से जोड़ने विशेष संवेदनशीलता प्रशिक्षण, 75 वैद्य हुए प्रशिक्षित
नरेंद्र मिश्रा, बलरामपुर
जिला स्वास्थ्य विभाग बलरामपुर द्वारा यूनिसेफ छत्तीसगढ़ एवं एमसीसीआर (MCCR) ट्रस्ट के सहयोग से जिले के सभी छह विकासखंडों के पारंपरिक वैद्यों के लिए विशेष संवेदनशीलता एवं प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में 75 पारंपरिक वैद्यों को बाल मधुमेह (टाइप-1 डायबिटीज), सिकल सेल रोग तथा जन्मजात हृदय विकार की पहचान, प्रारंभिक लक्षण एवं समय पर उपचार के संबंध में प्रशिक्षण दिया गया।
प्रशिक्षण के दौरान विशेषज्ञों ने बताया कि बच्चों में बार-बार प्यास लगना, अधिक भूख लगना, बार-बार पेशाब आना या बिस्तर गीला करना, शरीर का दुबला-पतला होना तथा जल्दी थकान महसूस होना बाल मधुमेह के प्रमुख लक्षण हैं। वहीं शरीर और जोड़ों में दर्द, सांस लेने में कठिनाई, बार-बार खून की कमी और तेज दर्द जैसी समस्याएं सिकल सेल रोग के संकेत हो सकते हैं।
प्रशिक्षकों ने पारंपरिक वैद्यों से अपील की कि यदि किसी बच्चे में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तत्काल नजदीकी स्वास्थ्य केंद्र भेजकर ब्लड शुगर एवं सिकल सेल की जांच कराई जाए, ताकि समय पर उपचार शुरू किया जा सके।
प्रशिक्षण में इस बात पर विशेष जोर दिया गया कि सिकल सेल रोग एक अनुवांशिक (जेनेटिक) एवं गैर-संचारी बीमारी है। साथ ही बाल विवाह और किशोरावस्था में गर्भधारण जैसी सामाजिक समस्याओं को रोकने तथा इनके प्रति समाज में जागरूकता बढ़ाने का भी संदेश दिया गया।
कार्यक्रम को सफल बनाने में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय सिंह, सिविल सर्जन डॉ. शशांक गुप्ता, जिला टीकाकरण अधिकारी डॉ. अनुज टोप्पो, जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री स्मृति एक्का, जिला मीडिया प्रभारी दिव्य किशोर गुप्ता, विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक नेतराम तथा आरएमएनसीएच सलाहकार सौरभ का महत्वपूर्ण योगदान रहा।
यूनिसेफ की ओर से डॉ. गजेंद्र सिंह के नेतृत्व में तथा एमसीसीआर ट्रस्ट के संचालक डॉ. डी. श्याम कुमार के विशेष सहयोग से प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफल संचालन किया गया। जिला स्वास्थ्य विभाग ने बताया कि इस प्रकार के प्रशिक्षण से पारंपरिक वैद्य गंभीर बीमारियों की प्रारंभिक पहचान कर मरीजों को समय पर स्वास्थ्य संस्थानों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकेंगे।

