विधायक के गृह क्षेत्र के स्कूल से सामने आया कथित वीडियो, ग्रामीण बोले— आखिर सुधार कब?**
चंद्रिका कुशवाहा /शशांक दुबे,सूरजपुर/रामानुजनगर
प्रदेश सरकार ग्रामीण क्षेत्रों में शिक्षा व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए करोड़ों रुपये खर्च कर रही है। स्कूलों में आधारभूत सुविधाओं का विस्तार, गुणवत्तापूर्ण शिक्षा, शिक्षक प्रशिक्षण और विभिन्न योजनाओं के माध्यम से सरकारी विद्यालयों की तस्वीर बदलने का लगातार प्रयास किया जा रहा है। इसके बावजूद जमीनी स्तर पर समय-समय पर सामने आने वाली घटनाएं इन प्रयासों पर सवाल खड़े कर रही हैं।
इसी कड़ी में सूरजपुर जिले के प्रेमनगर विधानसभा अंतर्गत ग्राम पंचायत साल्ही के प्राथमिक शाला खोरखोरीपारा से एक कथित वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है। वायरल वीडियो में विद्यालय के प्रधानपाठक हरिनंदन सिंह कथित रूप से नशे की हालत में विद्यालय परिसर के बाहर दिखाई दे रहे हैं। हालांकि वीडियो की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और पूरे मामले की जांच होना बाकी है।
मिली जानकारी के अनुसार, घटना विधायक के गृह क्षेत्र के समीप की बताई जा रही है। यही वजह है कि यह मामला क्षेत्र में चर्चा का विषय बन गया है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि जनप्रतिनिधि के गृह क्षेत्र के आसपास स्थित विद्यालय की स्थिति को लेकर ऐसे आरोप सामने आ रहे हैं, तो दूरस्थ ग्रामीण क्षेत्रों के विद्यालयों की स्थिति को लेकर भी गंभीर सवाल उठना स्वाभाविक है।
ग्रामीणों का कहना है कि शिक्षक केवल पढ़ाई ही नहीं कराते, बल्कि बच्चों के चरित्र निर्माण और संस्कारों के भी प्रमुख आधार होते हैं। ऐसे में यदि किसी शिक्षक का आचरण विवादों में आता है तो इसका सीधा असर विद्यार्थियों, अभिभावकों और पूरे शिक्षा तंत्र की विश्वसनीयता पर पड़ता है।
वायरल वीडियो के बाद सोशल मीडिया पर भी लोगों की प्रतिक्रियाएं सामने आ रही हैं। कई लोगों ने शिक्षा विभाग से निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा है कि यदि आरोप सही पाए जाते हैं तो केवल औपचारिक नोटिस जारी करने के बजाय कठोर विभागीय कार्रवाई की जानी चाहिए, ताकि भविष्य में इस प्रकार की घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।
इस संबंध में विकासखंड शिक्षा अधिकारी अवधेश साहू ने कहा कि मामला गंभीर है और उनके संज्ञान में आया है। पूरे प्रकरण की जांच कर उच्च अधिकारियों को प्रतिवेदन भेजा जाएगा। जांच रिपोर्ट के आधार पर नियमानुसार कार्रवाई की जाएगी।
फिलहाल पूरे मामले में सबकी निगाहें शिक्षा विभाग की जांच पर टिकी हैं। अब यह देखना होगा कि सरकार की शिक्षा सुधार की मंशा को धरातल पर लागू करने के लिए विभाग कितनी गंभीरता दिखाता है और यदि आरोप प्रमाणित होते हैं तो क्या वास्तव में जिम्मेदारों पर प्रभावी कार्रवाई होती है।

