कलेक्टर ने कठिनाइयों को समझते हुए बिना किसी विलंब के मौके पर ही अधिकारियों को सहायता उपलब्ध कराने के दिए निर्देश …
नरेंद्र मिश्रा, बलरामपुर
जनदर्शन में रोजाना सैकड़ों लोग अपनी समस्याएं लेकर पहुंचते हैं। कई आवेदन फाइलों में दर्ज हो जाते हैं, तो कई मामलों में समाधान मिलने में समय लगता है। लेकिन इस बार जनदर्शन में जो हुआ, उसने वहां मौजूद हर व्यक्ति को भावुक कर दिया। एक दृष्टिबाधित युवक उम्मीद लेकर पहुंचा था और कुछ ही देर बाद उसके चेहरे पर आत्मविश्वास और मुस्कान लौट आई।
बलरामपुर जिला मुख्यालय में आयोजित जनदर्शन के दौरान शंकरगढ़ विकासखंड के ग्राम चांगरो निवासी जन्म से दृष्टिबाधित वीरेंद्र चीक अपनी परेशानी लेकर कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के पास पहुंचे। वर्षों से वे अपने दैनिक जीवन के छोटे-छोटे कार्यों के लिए दूसरों पर निर्भर रहने को मजबूर थे। मोबाइल चलाना, किसी को फोन करना, डिजिटल भुगतान करना या किसी जरूरी जानकारी तक पहुंचना उनके लिए आसान नहीं था।
कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने वीरेंद्र की पूरी बात बेहद संवेदनशीलता से सुनी। उनकी कठिनाइयों को समझते हुए बिना किसी विलंब के मौके पर ही अधिकारियों को आवश्यक सहायता उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। कुछ ही समय में वीरेंद्र को दृष्टिबाधितों के लिए विशेष रूप से उपयोगी मोबाइल फोन और स्मार्ट केन स्टिक उपलब्ध करा दी गई।
सहायता मिलने के बाद वीरेंद्र की खुशी देखते ही बन रही थी। उनके चेहरे पर वर्षों बाद आत्मविश्वास साफ झलक रहा था। भावुक होकर उन्होंने कलेक्टर के प्रति आभार व्यक्त करते हुए कहा, “अब यह मोबाइल ही मेरा भाई और मेरा सबसे बड़ा साथी है”। पहले हर छोटे-बड़े काम के लिए मुझे किसी न किसी का सहारा लेना पड़ता था, लेकिन अब मैं स्वयं फोन कर सकूंगा, डिजिटल भुगतान कर सकूंगा और अपने कई जरूरी काम बिना किसी पर निर्भर हुए कर पाऊंगा।”
उनकी यह बात सुनकर जनदर्शन कक्ष में मौजूद अधिकारी और अन्य लोग भी भावुक हो उठे। यह सिर्फ एक मोबाइल फोन नहीं था, बल्कि वीरेंद्र के लिए आत्मनिर्भरता की नई शुरुआत थी। स्मार्ट केन स्टिक की मदद से अब वे अधिक सुरक्षित तरीके से आवागमन कर सकेंगे, जबकि विशेष मोबाइल उन्हें आधुनिक तकनीक के माध्यम से दुनिया से जोड़ने का माध्यम बनेगा।
कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने वीरेंद्र का आत्मीयता से हालचाल जाना और उन्हें भरोसा दिलाया कि जिला प्रशासन हर जरूरतमंद व्यक्ति तक योजनाओं का लाभ पहुंचाने के लिए पूरी संवेदनशीलता के साथ कार्य कर रहा है। उन्होंने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए कि दिव्यांगजनों की आवश्यकताओं को प्राथमिकता के आधार पर पूरा किया जाए, ताकि वे सम्मानपूर्वक और आत्मनिर्भर जीवन जी सकें।
यह घटना केवल एक प्रशासनिक कार्रवाई नहीं, बल्कि मानवीय संवेदना का उदाहरण बन गई। जनदर्शन में मिली इस त्वरित सहायता ने यह संदेश दिया कि यदि प्रशासन संवेदनशील हो तो किसी जरूरतमंद की जिंदगी में कुछ ही मिनटों में बड़ा बदलाव लाया जा सकता है।
वीरेंद्र के चेहरे पर लौटी मुस्कान और उनके शब्द—”अब यह मोबाइल ही मेरा भाई और साथी है”—इस बात की गवाही देते हैं कि सही समय पर मिली छोटी-सी मदद भी किसी के जीवन में नई रोशनी बन सकती है। यही कारण है कि बलरामपुर जनदर्शन की यह घटना अब लोगों के बीच चर्चा का विषय बनी हुई है।

