बलरामपुर।
छत्तीसगढ़ के बलरामपुर जिले में सरकारी निर्माण कार्य की गुणवत्ता को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। रामचंद्रपुर विकासखंड के ग्राम पंचायत पिपरौल में कृषि विभाग की वाटरशेड योजना के तहत करीब 3 लाख 50 हजार रुपये की लागत से बनाई गई नाली पहली ही बारिश में जगह-जगह से टूटकर बिखर गई। करीब 50 मीटर लंबी इस नाली की बदहाल स्थिति देखकर ग्रामीणों और किसानों में नाराजगी है। 
जून में हुआ निर्माण, पहली बारिश में खुली पोल
जानकारी के अनुसार, ग्राम पंचायत पिपरौल में सागर बांध के ओवरफ्लो पानी को नाली के माध्यम से किसानों के खेतों तक पहुंचाने के उद्देश्य से निर्माण कार्य कराया गया था। इसके लिए कृषि विभाग की वाटरशेड योजना के तहत लगभग 3.50 लाख रुपये खर्च किए गए। लेकिन मानसून की पहली बारिश के बाद ही नाली कई स्थानों पर टूट गई। निर्माण की यह स्थिति कार्य की गुणवत्ता और निगरानी व्यवस्था पर सवाल खड़े कर रही है।
घटिया निर्माण सामग्री के इस्तेमाल का आरोप
ग्रामीणों और किसानों का आरोप है कि नाली निर्माण में घटिया सामग्री का इस्तेमाल किया गया, जिसके कारण यह पहली बारिश भी नहीं झेल सकी। ग्रामीणों ने यह सवाल भी उठाया कि निर्माण स्थल पर नागरिक सूचना बोर्ड नहीं लगाया गया था। ऐसे में कार्य की लागत, स्वीकृति और निर्माण से संबंधित जानकारी सार्वजनिक नहीं होने से पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं। किसानों ने मामले की निष्पक्ष जांच कर जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।
इस निर्माण कार्य को लेकर जिला पंचायत सदस्य बद्री यादव पर भी सवाल उठाए जा रहे हैं। विवाद सामने आने के बाद उन्होंने बारिश का हवाला देते हुए कहा कि कार्य अभी निर्माणाधीन है और इसे जल्द ही ठीक करा दिया जाएगा। हालांकि, निर्माण कार्य की वास्तविक स्थिति, उसकी गुणवत्ता और जिम्मेदारी तय करने के लिए तकनीकी जांच महत्वपूर्ण मानी जा रही है।
कृषि मंत्री ने लिया संज्ञान, जांच का भरोसा
मामले में कृषि मंत्री रामविचार नेताम ने प्रकरण पर संज्ञान लेते हुए जांच और दोषियों के खिलाफ सख्त कार्रवाई का भरोसा दिया है। वहीं, कृषि विभाग के उपसंचालक परमानंद वर्मा ने भी जांच के बाद नियमानुसार कार्रवाई करने की बात कही है।
जांच के नतीजों पर टिकी निगाहें
सरकारी योजना के तहत किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से बनाई गई नाली का पहली ही बारिश में क्षतिग्रस्त होना कई सवाल खड़े करता है। अब देखना होगा कि जांच में निर्माण की गुणवत्ता, खर्च की गई राशि और जिम्मेदार अधिकारियों तथा संबंधित लोगों की भूमिका को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं। ग्रामीणों को उम्मीद है कि जांच केवल औपचारिकता बनकर नहीं रह जाएगी, बल्कि दोषियों की जिम्मेदारी तय कर आवश्यक कार्रवाई भी की जाएगी।

