बुधनी। धार्मिक और आध्यात्मिक जगत से दुखद खबर सामने आई है। रुद्र धाम आश्रम के पूज्य संत श्री श्री 108 बजरंग गिरी महाराज 12 सितंबर की रात ब्रह्मलीन हो गए। उनके ब्रह्मलीन होने का समाचार मिलते ही क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। बड़ी संख्या में श्रद्धालु और अनुयायी अंतिम दर्शन एवं श्रद्धांजलि के लिए रुद्र धाम आश्रम पहुंचे।
संत-महात्माओं की मौजूदगी में दी गई समाधि
13 सितंबर को रुद्र धाम आश्रम परिसर में संत-महात्माओं और श्रद्धालुओं की मौजूदगी में विधि-विधान के साथ बजरंग गिरी महाराज को समाधि दी गई। इस दौरान बड़ी संख्या में भक्त मौजूद रहे और नम आंखों से अपने पूज्य संत को अंतिम विदाई दी।
बड़े गुरु के महाप्रयाण के 15 दिन बाद ब्रह्मलीन हुए महाराज
बताया जा रहा है कि करीब 15 दिन पहले ही संत बजरंग गिरी महाराज के बड़े गुरु परम पूज्य संत परमानंद परमहंस जी महाराज ब्रह्मलीन हुए थे। बड़े गुरु के महाप्रयाण के महज करीब 15 दिन के भीतर बजरंग गिरी महाराज के भी ब्रह्मलीन होने से उनके अनुयायियों में गहरा शोक है।
नर्मदा तट पर की तपस्या और आध्यात्मिक साधना
संत बजरंग गिरी महाराज ने मां नर्मदा के पवित्र तट पर बरमान घाट से करीब 20 किलोमीटर दूर आश्रम की स्थापना की थी। उन्होंने लंबे समय तक यहां तपस्या और आध्यात्मिक साधना की।
उनके प्रयासों से ग्राम मोगरा, मर्दानपुर और रमगढ़ा में द्वादश लिंग की स्थापना की गई। वहीं रायसेन जिले के विसेर गांव में भी आश्रम का निर्माण कराया गया, जहां द्वादश लिंग की स्थापना का कार्य जारी बताया गया है।
तपस्या, अध्यात्म और सेवा को समर्पित रहा जीवन
बजरंग गिरी महाराज ने अपना जीवन तपस्या, अध्यात्म और सेवा के लिए समर्पित किया। उनके ब्रह्मलीन होने से रुद्र धाम आश्रम सहित आसपास के क्षेत्र में शोक का माहौल है।
श्रद्धालुओं और संत समाज ने महाराज श्री के चरणों में श्रद्धासुमन अर्पित करते हुए उन्हें भावपूर्ण विदाई दी। अनुयायियों ने उनके ब्रह्मलीन होने को आध्यात्मिक जगत और संत समाज के लिए अपूरणीय क्षति बताया।
