उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ में धान खपाने की आशंका, तहसीलदार और नायब तहसीलदार ने मंडी अधिनियम के तहत शुरू की कार्रवाई
बसंतपुर/वाड्रफनगर, बलरामपुर।
छत्तीसगढ़ में समर्थन मूल्य पर धान खरीदी शुरू होने से पहले ही धान के अवैध परिवहन और बिचौलियों की गतिविधियों पर प्रशासन ने निगरानी तेज कर दी है। इसी क्रम में उत्तर प्रदेश से छत्तीसगढ़ में धान खपाने की आशंका के बीच बसंतपुर थाना पुलिस ने देर रात थाना के सामने जांच के दौरान धान से लदे चार पिकअप वाहनों को पकड़ा है।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, बसंतपुर थाना प्रभारी विजय प्रताप सिंह तथा उनकी टीम द्वारा रात में थाना के सामने अवैध धान परिवहन की जांच की जा रही थी। इसी दौरान चार पिकअप वाहनों में धान ले जाते हुए पकड़ा गया। मामले की सूचना पर वाड्रफनगर तहसीलदार एवं नायब तहसीलदार द्वारा कार्रवाई करते हुए मंडी अधिनियम के तहत जब्ती की प्रक्रिया शुरू की गई।
तहसीलदार ने कहा—लगातार जारी रहेगी कार्रवाई
इस मामले में तहसीलदार ने बताया कि अवैध धान परिवहन के विरुद्ध कार्रवाई लगातार जारी रहेगी। प्रशासन का उद्देश्य समर्थन मूल्य पर धान खरीदी व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखना और दूसरे राज्यों से धान लाकर अवैध रूप से खपाने की कोशिशों पर रोक लगाना है।
मंडी शुल्क को लेकर उठे सवाल
मामले में मंडी व्यवस्था को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं। मंडी उप निरीक्षक धनवार भूप सिंह सागर से जब पूछा गया कि आज की तारीख में पकड़े गए पिकअप वाहनों में से कितने वाहनों का मंडी शुल्क काटा गया है, तो उनके द्वारा कथित तौर पर बताया गया कि केवल एक पिकअप वाहन का ही मंडी शुल्क काटा गया है।
वहीं, एक पिकअप वाहन मालिक ने आरोप लगाया कि धनवार मंडी में 100 रुपये लेकर बिना मंडी पर्ची काटे वाहन को छोड़ दिया जाता है। इस आरोप की स्वतंत्र पुष्टि होना बाकी है। मामले में संबंधित मंडी प्रबंधन का पक्ष सामने आना भी आवश्यक है।
जांच के बाद ही स्पष्ट होगी पूरी स्थिति
चार पिकअप वाहनों में लदे धान के स्रोत, परिवहन से संबंधित दस्तावेजों, मंडी शुल्क की स्थिति और कथित अनियमितताओं की जांच महत्वपूर्ण है। यदि जांच में नियमों के उल्लंघन की पुष्टि होती है, तो संबंधित लोगों के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई की जा सकती है।अब देखना होगा कि प्रशासन की जांच में धान के परिवहन से जुड़े दस्तावेजों और मंडी शुल्क संबंधी आरोपों को लेकर क्या तथ्य सामने आते हैं। समर्थन मूल्य पर खरीदी की व्यवस्था को पारदर्शी बनाए रखने के लिए पुलिस, राजस्व विभाग और मंडी प्रशासन के बीच समन्वय आवश्यक है।
पूरे मामले में वाड्राफनगर तहसीलदार अश्वनी चंद्रा और एसडीएम तुलसी राम भगत से पक्ष लेने का प्रयास की गई परन्तु उनसे संपर्क नहीं हो सका

