स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को दी गई समय पर पहचान व उपचार की जानकारी…
नरेंद्र मिश्रा, बलरामपुर
जिला स्वास्थ्य विभाग, बलरामपुर द्वारा यूनिसेफ छत्तीसगढ़, एकम फाउंडेशन एवं एमसीसीआर ट्रस्ट के सहयोग से टाइप-1 डायबिटीज (बाल मधुमेह) विषय पर जिला स्तरीय विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित किया गया। प्रशिक्षण का उद्देश्य स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं की क्षमता को सुदृढ़ बनाना था, ताकि वे बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज की समय पर पहचान, उचित परामर्श, शीघ्र रेफरल तथा प्रभावी प्रबंधन सुनिश्चित कर सकें।
कार्यक्रम के अंतर्गत जिले के विभिन्न विकासखंडों से 49 कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स (सीएचओ) तथा 146 मितानिन प्रशिक्षकों को प्रशिक्षण दिया गया। कार्यक्रम में मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डॉ. विजय सिंह, जिला कार्यक्रम प्रबंधक सुश्री स्मृति एक्का, जिला स्वास्थ्य विभाग के अन्य अधिकारी तथा यूनिसेफ, एकम फाउंडेशन एवं एमसीसीआर ट्रस्ट के प्रतिनिधियों सहित लगभग 194 प्रतिभागियों ने सहभागिता की।
प्रशिक्षण के दौरान बच्चों में टाइप-1 डायबिटीज के प्रमुख लक्षणों—अत्यधिक प्यास लगना, अधिक भूख लगना, बार-बार पेशाब आना या बिस्तर गीला करना, तेजी से वजन घटना, अत्यधिक कमजोरी और थकान—की पहचान पर विशेष जोर दिया गया। विशेषज्ञों ने बताया कि यदि किसी बच्चे में ऐसे लक्षण दिखाई दें तो उसे तुरंत निकटतम स्वास्थ्य केंद्र ले जाकर ब्लड शुगर की जांच करानी चाहिए। साथ ही बार-बार संक्रमण से ग्रसित बच्चों में भी मधुमेह की जांच कराने की आवश्यकता बताई गई।
प्रशिक्षण में टाइप-1 डायबिटीज की गंभीर अवस्था डायबिटिक कीटोएसिडोसिस (डीकेए) की शीघ्र पहचान और ऐसे मामलों में तत्काल अस्पताल में भर्ती कर उचित उपचार सुनिश्चित करने की जानकारी भी दी गई। विशेषज्ञों ने बताया कि समय पर पहचान और उपचार से बच्चों को गंभीर जटिलताओं से बचाया जा सकता है।
इस दौरान समाज में प्रचलित भ्रांतियों, जैसे कि बच्चों को मधुमेह नहीं हो सकता या झाड़-फूंक से यह रोग ठीक हो जाता है, के प्रति भी जागरूक किया गया। विशेषज्ञों ने स्पष्ट किया कि टाइप-1 डायबिटीज एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें शरीर पर्याप्त मात्रा में इंसुलिन बनाना बंद कर देता है। ऐसे बच्चों को जीवनभर इंसुलिन उपचार की आवश्यकता होती है। नियमित उपचार, समय पर जांच और निरंतर फॉलो-अप से वे सामान्य एवं स्वस्थ जीवन जी सकते हैं।
कार्यक्रम को सफल बनाने में जिला स्वास्थ्य विभाग, यूनिसेफ, एकम फाउंडेशन एवं एमसीसीआर ट्रस्ट का महत्वपूर्ण योगदान रहा। जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से डॉ. विजय सिंह (मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी), डॉ. अनुज टोप्पो (जिला टीकाकरण अधिकारी), सुश्री स्मृति एक्का (जिला कार्यक्रम प्रबंधक), दिव्य किशोर गुप्ता (जिला मीडिया प्रभारी), नेतराम (विकासखंड कार्यक्रम प्रबंधक, बलरामपुर) तथा श्री सौरभ (प्रभारी आरएमएनसीएच सलाहकार) की महत्वपूर्ण भूमिका रही।
यूनिसेफ की ओर से डॉ. गजेंद्र सिंह के नेतृत्व में तथा डॉ. डी. श्याम कुमार (संचालक, एमसीसीआर ट्रस्ट) एवं एकम फाउंडेशन के सहयोग से प्रशिक्षण का सफल आयोजन किया गया। विशेषज्ञों ने कम्युनिटी हेल्थ ऑफिसर्स एवं मितानिन प्रशिक्षकों से अपने-अपने कार्यक्षेत्र में बाल मधुमेह के प्रति जन-जागरूकता बढ़ाने तथा संभावित मरीजों की समय पर पहचान कर उन्हें शीघ्र उपचार एवं रेफरल उपलब्ध कराने की अपील की।

