हिंदू धर्म में श्री यंत्र को यंत्रराज कहा जाता है। इसे माता लक्ष्मी और भगवान विष्णु की दिव्य शक्ति का प्रतीक माना जाता है। मान्यता है कि श्री यंत्र की विधिवत स्थापना और नियमित पूजा से घर में सुख-समृद्धि, धन, वैभव और सकारात्मक ऊर्जा का वास होता है। हालांकि, कई लोगों के मन में यह सवाल रहता है कि घर में एक से अधिक श्री यंत्र रखना चाहिए या नहीं। आइए जानते हैं इससे जुड़े प्रमुख नियम।
श्री यंत्र क्या है?
श्री यंत्र केवल धातु या कागज पर बना एक चित्र नहीं, बल्कि एक अत्यंत पवित्र और शक्तिशाली आध्यात्मिक यंत्र माना जाता है। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इसमें माता लक्ष्मी की कृपा और समृद्धि का प्रतीकात्मक वास माना जाता है। इसलिए इसकी स्थापना पूरी श्रद्धा और विधि-विधान से की जाती है।
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घर में कितने श्री यंत्र रखने चाहिए?
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घर में अधिकतम दो श्री यंत्र रखना शुभ माना जाता है।
- एक श्री यंत्र पूजा घर में स्थापित किया जा सकता है।
- दूसरा तिजोरी या धन रखने के स्थान पर रखा जा सकता है।
मान्यता है कि तिजोरी में श्री यंत्र रखने से आर्थिक समृद्धि बनी रहती है। हालांकि, सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि श्री यंत्र की नियमित पूजा और सम्मानपूर्वक देखभाल की जाए।
श्री यंत्र स्थापित करने का सही तरीका
- श्री यंत्र की स्थापना शुक्रवार के दिन करना शुभ माना जाता है।
- इसे घर की उत्तर दिशा या पूजा स्थान में स्थापित करें।
- लकड़ी की चौकी पर लाल वस्त्र बिछाकर श्री यंत्र रखें।
- स्थापना से पहले गंगाजल और कच्चे दूध से अभिषेक करें।
- इसके बाद श्रद्धापूर्वक माता लक्ष्मी का पूजन करें और इस मंत्र का जाप करें:
“ॐ श्रीं ह्रीं श्रीं कमले कमलालये प्रसीद प्रसीद श्रीं ह्रीं श्रीं ॐ महालक्ष्म्यै नमः।”
ध्यान रखने योग्य बातें
धार्मिक मान्यताओं के अनुसार, यदि संभव हो तो किसी योग्य और विद्वान पुरोहित द्वारा सिद्ध या प्राण-प्रतिष्ठित श्री यंत्र की स्थापना कराना अधिक शुभ माना जाता है। साथ ही, केवल श्री यंत्रों की संख्या बढ़ाने के बजाय उनकी नियमित पूजा, स्वच्छता और श्रद्धा को अधिक महत्व दिया जाता है।

