“5 करोड़ की नहर… पहली बारिश में ही धराशाही , कुदरत का कहर या निर्माण में बड़ा खेल…?
नरेंद्र मिश्रा, बलरामपुर/रामानुजगंज
किसानों को सिंचाई सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से जल संसाधन विभाग द्वारा भाला-गिरवानी नहर परियोजना के तहत लगभग 5 करोड़ रुपये की लागत से निर्माणाधीन कंक्रीट नहर पहली ही मूसलाधार बारिश में क्षतिग्रस्त हो गई। घटना के बाद निर्माण कार्य की गुणवत्ता पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं और ग्रामीणों में भारी आक्रोश है।
ग्रामीणों का कहना है कि जिस नहर का निर्माण अभी पूरा भी नहीं हुआ था, वह पहली ही तेज बारिश का दबाव नहीं झेल सकी। इससे निर्माण कार्य की गुणवत्ता और विभागीय निगरानी पर सवाल उठने लगे हैं। लोगों का आरोप है कि यदि निर्माण कार्य निर्धारित मानकों के अनुसार किया गया होता तो नहर इतनी जल्दी नहीं टूटती।
स्थानीय किसान सरवन सोनी, इफ्तेखार खान, विनीत गुप्ता और रामकुमार धुर्वे ने बताया कि निर्माण के दौरान ही उन्होंने कई बार अधिकारियों को घटिया निर्माण सामग्री और गुणवत्ता संबंधी शिकायतें दी थीं। उनका आरोप है कि कंक्रीट की सही तरीके से पटाई और देखरेख नहीं की गई तथा निर्माण में मानक सामग्री का उपयोग भी नहीं हुआ। बावजूद इसके विभाग ने शिकायतों पर ध्यान नहीं दिया।
ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि निर्माण स्थल पर विभागीय इंजीनियर नियमित रूप से मौजूद नहीं रहते थे और ठेकेदार के तकनीकी कर्मचारी भी अधिकांश समय अनुपस्थित रहते थे। इससे निर्माण कार्य की निगरानी प्रभावित हुई और पहली ही बारिश में नहर टूटने जैसी स्थिति सामने आ गई।भाला और विजयनगर क्षेत्र के सैकड़ों किसान इस परियोजना से सिंचाई सुविधा मिलने की उम्मीद लगाए बैठे हैं। लेकिन नहर के क्षतिग्रस्त होने से किसानों की चिंता बढ़ गई है। उनका कहना है कि यदि अभी से गुणवत्ता सुनिश्चित नहीं की गई तो भविष्य में पूरी परियोजना प्रभावित हो सकती है और करोड़ों रुपये की सरकारी राशि पर सवाल खड़े हो जाएंगे।ग्रामीणों ने जल संसाधन विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से पूरे मामले की उच्च स्तरीय तकनीकी जांच, निर्माण गुणवत्ता का परीक्षण तथा दोषी अधिकारियों और संबंधित ठेकेदार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की मांग की है। उनका कहना है कि किसानों के हितों से जुड़ी इस महत्वपूर्ण परियोजना में किसी भी प्रकार की लापरवाही स्वीकार नहीं की जा सकती।

