ग्रामीणों का अल्टीमेटम— ग्रामीणों ने दी आर-पार की चेतावनी, हजारों वाहन रोज़ गुजर रहे, ग्रामीणों का अल्टीमेटम—अब हादसा हुआ तो जिम्मेदार PWD और ठेकेदार कलर पट्टी
चंद्रिका कुशवाहा , सूरजपुर
प्रतापपुर-बनारस मुख्य मार्ग पर भैंसामुंडा स्थित महानदी पुल इन दिनों लोगों के लिए सुविधा नहीं, बल्कि खतरे का पर्याय बन चुका है। पुल पर बने बड़े-बड़े गहरे गड्ढों में बारिश का पानी भर जाने से हर दिन वाहन चालक मौत से जंग लड़ते हुए गुजर रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि यह पुल अब “मौत का जाल” बन गया है और यदि समय रहते स्थायी मरम्मत नहीं हुई तो कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है।
सबसे बड़ा सवाल यह है कि करीब चार-पांच महीने पहले लाखों रुपये खर्च कर मरम्मत कराई गई थी, फिर पुल की हालत इतनी जल्दी दोबारा कैसे बिगड़ गई? ग्रामीणों का आरोप है कि मरम्मत कार्य केवल खानापूर्ति साबित हुआ। पुल पर बने गहरे गड्ढों को न तो पूरी तरह भरा गया और न ही गुणवत्ता के साथ काम किया गया। अब बरसात में वही गड्ढे पानी से भरकर जानलेवा बन चुके हैं।
प्रतिदिन हजारों छोटे-बड़े वाहन इसी पुल से गुजरते हैं। स्कूल बसें, यात्री वाहन, एंबुलेंस, मालवाहक ट्रक और दोपहिया वाहन सभी इसी रास्ते पर निर्भर हैं। पानी से ढके गड्ढों का अंदाजा न लग पाने के कारण आए दिन बाइक सवार फिसल रहे हैं और चारपहिया वाहन भी क्षतिग्रस्त हो रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि अब यह केवल सड़क की समस्या नहीं, बल्कि सीधे लोगों की जान से जुड़ा मामला बन चुका है।
ग्रामीणों, व्यापारियों, वाहन चालकों और जनप्रतिनिधियों का आरोप है कि ठेकेदार की लापरवाही और लोक निर्माण विभाग (PWD) की अनदेखी के कारण सरकार की छवि खराब हो रही है। यदि निर्माण कार्य की सही निगरानी होती और गुणवत्ता से समझौता नहीं किया जाता तो कुछ ही महीनों में पुल की यह हालत नहीं होती। लोगों का कहना है कि विभाग सब कुछ जानता है, लेकिन कार्रवाई के बजाय चुप्पी साधे हुए है।
ग्रामीणों ने यह भी याद दिलाया कि यह पुल काफी पुराना है और उसकी आयु को लेकर भी समय-समय पर सवाल उठते रहे हैं। ऐसे में ऊपर से जर्जर सड़क और गहरे गड्ढे किसी बड़े हादसे की आशंका को और बढ़ा रहे हैं। लोगों का कहना है कि यदि पुल की तकनीकी जांच और मजबूत मरम्मत नहीं कराई गई तो भविष्य में गंभीर दुर्घटना से इनकार नहीं किया जा सकता।
स्थानीय सरपंचों, व्यापारियों और ग्रामीणों ने साफ चेतावनी दी है कि यदि किसी भी प्रकार की जनहानि होती है तो उसकी पूरी जिम्मेदारी लोक निर्माण विभाग और संबंधित अधिकारियों की होगी। उन्होंने पुल की तत्काल स्थायी मरम्मत, निर्माण कार्य की गुणवत्ता की जांच तथा दोषी ठेकेदार और जिम्मेदार अधिकारियों पर कार्रवाई की मांग की है।
इस मामले में प्रतापपुर एसडीएम ललिता भगत ने कहा कि मामला गंभीर है। संबंधित अधिकारी को तत्काल सुधार के निर्देश दिए जाएंगे तथा पूरे मामले से सूरजपुर कलेक्टर को अवगत कराकर आवश्यक कार्रवाई कराई जाएगी।
ग्रामीणों ने प्रशासन को अंतिम चेतावनी देते हुए कहा है कि यदि जल्द ही पुल के गड्ढों की स्थायी मरम्मत शुरू नहीं की गई, तो क्षेत्रवासी चक्काजाम और उग्र आंदोलन करने के लिए मजबूर होंगे। उनका कहना है कि अब केवल आश्वासन नहीं, ज़मीन पर कार्रवाई चाहिए, क्योंकि हर गुजरता दिन किसी बड़ी अनहोनी का खतरा बढ़ा रहा है।

