नई दिल्ली। वर्ष 2036 ओलिंपिक खेलों की मेजबानी हासिल करने की भारत की महत्वाकांक्षा पर अंतिम फैसला अब वर्ष 2029 के मध्य में लिया जाएगा। अंतरराष्ट्रीय ओलिंपिक समिति (IOC) ने मेजबान चयन प्रक्रिया को अधिक पारदर्शी, स्पष्ट और लागत प्रभावी बनाने के लिए नई रणनीतिक प्रक्रिया लागू करने का निर्णय लिया है।
लुसाने में आयोजित IOC के 146वें सत्र में भावी मेजबान आयोग की अध्यक्ष और पूर्व क्रोएशियाई राष्ट्रपति Kolinda Grabar-Kitarović द्वारा प्रस्तुत प्रस्ताव को मतदान के बाद मंजूरी दे दी गई। उन्होंने कहा कि संभावित मेजबान देशों और शहरों की ओर से चयन प्रक्रिया में अधिक पारदर्शिता और स्पष्ट दिशा-निर्देशों की मांग लगातार की जा रही थी।
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चयन प्रक्रिया में जोड़ा गया नया चरण
नई व्यवस्था के तहत ओलिंपिक मेजबान बनने के इच्छुक देशों और शहरों के लिए “स्ट्रैटेजिक डायलॉग” यानी रणनीतिक संवाद का नया चरण जोड़ा गया है। इसके तहत मार्च 2027 में संभावित दावेदारों का चयन किया जाएगा।
इसके बाद चयनित देशों को विस्तृत प्रश्नावली, वित्तीय गारंटी और अन्य जरूरी दस्तावेज जमा करने होंगे। दावेदारों का मूल्यांकन विभिन्न मानकों पर किया जाएगा, जिनमें लागत नियंत्रण, बुनियादी ढांचे की उपलब्धता, निर्माण कार्यों की समयसीमा और आयोजन क्षमता प्रमुख होंगे।
भारत ने पहले ही पेश कर दी है दावेदारी
भारत ने वर्ष 2024 में ही IOC को 2036 ओलिंपिक खेलों की मेजबानी के लिए आधिकारिक आशय पत्र (Letter of Intent) सौंप दिया था। वर्तमान में भारत IOC के साथ लगातार संवाद प्रक्रिया में शामिल है।
भारत ने गुजरात के Ahmedabad को संभावित मेजबान शहर के रूप में प्रस्तुत किया है। केंद्र और राज्य सरकार दोनों इस महत्वाकांक्षी परियोजना को लेकर सक्रिय रूप से तैयारी कर रहे हैं।
2028 में शुरू होगा लक्ष्यित संवाद
IOC की नई समयसीमा के अनुसार, रणनीतिक संवाद चरण पूरा होने के बाद वर्ष 2028 में “टारगेटेड डायलॉग” यानी लक्ष्यित संवाद की प्रक्रिया शुरू होगी। इसके बाद विस्तृत मूल्यांकन और समीक्षा के आधार पर मेजबान शहर और देश का चयन किया जाएगा।
संभावना है कि 2036 ओलिंपिक खेलों के मेजबान की आधिकारिक घोषणा वर्ष 2029 के मध्य में की जाएगी।
भारत के लिए ऐतिहासिक अवसर
यदि भारत की दावेदारी सफल होती है, तो यह देश के खेल इतिहास का सबसे बड़ा अंतरराष्ट्रीय आयोजन होगा। अब तक भारत ने कभी भी ओलिंपिक खेलों की मेजबानी नहीं की है। ऐसे में 2036 ओलिंपिक की मेजबानी मिलना देश के लिए एक ऐतिहासिक उपलब्धि साबित हो सकती है।
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे खेल अवसंरचना, पर्यटन, रोजगार और वैश्विक स्तर पर भारत की पहचान को नई मजबूती मिलेगी।

