चंद्रिका कुशवाहा, सूरजपुर।
करंजी चौकी क्षेत्र के बतरा बांध में हुआ नाव हादसा सिर्फ एक दुर्घटना नहीं, बल्कि तीन परिवारों के लिए ऐसा जख्म बन गया है, जिसे शायद कभी भुलाया नहीं जा सकेगा। करीब 30 घंटे तक चली बेचैन तलाश, उम्मीद और दुआओं के बीच आखिरकार वह दर्दनाक खबर सामने आई, जिसका डर हर किसी के मन में था। बांध के गहरे पानी ने तीन ग्रामीणों को अपने आगोश में समा लिया और बुधवार को उनके शव बरामद होने के साथ ही उम्मीदों का अंतिम दीप भी बुझ गया।
घटना के बाद से पूरे इलाके में सिर्फ एक ही चर्चा थी—क्या तीनों ग्रामीण जीवित मिल जाएंगे? परंतु समय बीतने के साथ उम्मीदें कमजोर पड़ती गईं। परिजन बांध किनारे टकटकी लगाए बैठे रहे, कोई भगवान से प्रार्थना करता रहा तो कोई राहत दल की हर गतिविधि पर नजर टिकाए रहा। मगर अंत में पानी ने वही लौटाया, जिसका किसी को इंतजार नहीं था।
जब नाव पलटी, मच गई चीख-पुकार
जानकारी के अनुसार प्रतिबंध के बावजूद कुछ ग्रामीण देर रात बतरा बांध में मछली पकड़ने पहुंचे थे। नाव में कुल नौ लोग सवार थे। रात का सन्नाटा, बांध का गहरा पानी और मछली पकड़ने की कोशिश के बीच अचानक नाव असंतुलित हो गई और देखते ही देखते पलट गई।
हादसे के बाद बांध में चीख-पुकार मच गई। छह ग्रामीणों ने किसी तरह हिम्मत जुटाकर तैरते हुए अपनी जान बचा ली, लेकिन तीन ग्रामीण गहरे पानी में समा गए। अंधेरा और पानी की गहराई उनके लिए काल बन गई।
30 घंटे तक चला जिंदगी और मौत के बीच संघर्ष
घटना की सूचना मिलते ही प्रशासन हरकत में आया। DDRF की टीम, स्थानीय गोताखोरों और प्रशासनिक अमले ने तत्काल राहत एवं बचाव अभियान शुरू किया। लगातार बारिश, खराब मौसम और बांध के गंदले पानी ने अभियान को बेहद चुनौतीपूर्ण बना दिया।
इसके बावजूद बचाव दल ने हार नहीं मानी। दिन-रात चले सर्च ऑपरेशन में मंगलवार को दो शव बरामद किए गए। इसके बाद तीसरे ग्रामीण की तलाश जारी रही। परिजनों की नजरें हर पल बांध की ओर लगी रहीं। आखिरकार बुधवार को तीसरा शव भी पानी से बाहर निकाल लिया गया और इसी के साथ 30 घंटे से चल रही तलाश समाप्त हो गई।
शव मिलते ही फूट पड़ा परिजनों का दर्द
जैसे ही तीसरे ग्रामीण का शव बाहर निकाला गया, वहां मौजूद परिजनों का धैर्य जवाब दे गया। माताओं की चीखें, बच्चों का विलाप और महिलाओं का करुण क्रंदन देखकर हर आंख नम हो गई। जो लोग अब तक किसी चमत्कार की उम्मीद लगाए बैठे थे, उन्हें हकीकत ने झकझोर कर रख दिया।
गांव में जैसे ही तीनों मौतों की खबर पहुंची, पूरे क्षेत्र में शोक की लहर दौड़ गई। घरों के बाहर लोगों की भीड़ जुटने लगी। हर कोई इस दर्दनाक हादसे की चर्चा करता नजर आया।
पूरे गांव पर छाया मातम
बतरा बांध के इस हादसे ने पूरे गांव को गमगीन कर दिया है। जिन घरों में कल तक हंसी-खुशी का माहौल था, वहां अब सन्नाटा पसरा हुआ है। तीन परिवारों के सामने अचानक दुखों का पहाड़ टूट पड़ा है।
प्रशासन ने आवश्यक कानूनी प्रक्रिया पूरी करते हुए शवों को पोस्टमार्टम के बाद परिजनों को सौंपने की कार्रवाई शुरू कर दी है। वहीं ग्रामीणों ने भविष्य में इस तरह की घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए बांध क्षेत्र में सुरक्षा व्यवस्था और निगरानी बढ़ाने की मांग की है।
बतरा बांध का यह हादसा एक बार फिर याद दिलाता है कि पानी की गहराई और नियमों की अनदेखी कभी-कभी ऐसी कीमत वसूल लेती है, जिसकी भरपाई संभव नहीं होती। 30 घंटे तक चली उम्मीद की लड़ाई आखिरकार मातम में बदल गई और तीन परिवारों की दुनिया हमेशा के लिए उजड़ गई।

