जनभागीदारी से जल संरक्षण की मिसाल:
कुसमी में एक दिन में खोदे गए 6 हजार से अधिक सोख्ता गड्ढे,कलेक्टर के निर्देश पर 77 ग्राम पंचायतों में चला महाअभियान, भू-जल स्तर बढ़ाने ग्रामीणों ने किया श्रमदान
बलरामपुर,
जल संरक्षण और भू-जल स्तर में वृद्धि के उद्देश्य से जनपद पंचायत कुसमी में “मोर गांव मोर पानी” अभियान के तहत व्यापक जनअभियान चलाया गया। कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी के निर्देश एवं जनपद पंचायत कुसमी के मार्गदर्शन में जिले की 77 ग्राम पंचायतों में एक साथ जल संरक्षण संबंधी कार्य किए गए।
अभियान के दौरान ग्रामीणों, पंचायत प्रतिनिधियों, स्व-सहायता समूहों की महिलाओं, रोजगार सहायकों और युवाओं ने उत्साहपूर्वक भागीदारी निभाई। सामूहिक श्रमदान के माध्यम से मात्र एक दिन में 6 हजार से अधिक सोख्ता गड्ढों का निर्माण किया गया। इन गड्ढों के जरिए वर्षा जल का संचयन होगा, जिससे पानी धीरे-धीरे जमीन में समाहित होकर भू-जल स्तर बढ़ाने में मदद करेगा।
प्रशासन के अनुसार 5 प्रतिशत मॉडल पर आधारित यह जल संरक्षण पहल वैज्ञानिक एवं व्यावहारिक दृष्टिकोण से तैयार की गई है। इसका मुख्य उद्देश्य वर्षा जल को अधिकतम मात्रा में धरती में पहुंचाकर भविष्य में जल संकट की समस्या को कम करना है।
अभियान में पंचायत प्रतिनिधियों के साथ बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सक्रिय सहभागिता निभाई। अधिकारियों ने कहा कि जल संरक्षण केवल शासन की जिम्मेदारी नहीं है, बल्कि समाज के प्रत्येक व्यक्ति की भागीदारी से ही इसे सफल बनाया जा सकता है। जनसहभागिता से संचालित यह अभियान आने वाले वर्षों में क्षेत्र के भू-जल स्तर में सुधार लाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने अभियान की सराहना करते हुए कहा कि कुसमी जनपद की सभी ग्राम पंचायतों ने एकजुट होकर जल संरक्षण का अनुकरणीय उदाहरण प्रस्तुत किया है। उन्होंने ग्रामीणों से वर्षा जल संचयन एवं जल संरक्षण के कार्यों को लगातार जारी रखने की अपील की।
प्रशासन का मानना है कि इस प्रकार के प्रयास न केवल जल संकट के समाधान में सहायक होंगे, बल्कि किसानों को सिंचाई के लिए पर्याप्त जल उपलब्ध कराने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। जनपद पंचायत कुसमी की यह पहल पूरे जिले के लिए प्रेरणास्रोत बनकर उभर रही है।

