सूरजपुर/रायपुर : शनिवार की छुट्टी नहीं, बच्चों के सपनों पर पड़ा ताला? फुल-टाइम स्कूल के फैसले पर शिक्षकों का विरोध, कहा- खत्म हो जाएगी रचनात्मक शिक्षा, टीचर्स एसोसिएशन बोला- खेल, योग और संस्कृति छीनना बच्चों के भविष्य से खिलवाड़
चंद्रिका कुशवाहा,सूरजपुर/रायपुर
छत्तीसगढ़ में स्कूलों की समय-सारिणी में किए गए बदलाव को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। हाई एवं हायर सेकेंडरी विद्यालयों में शनिवार को गतिविधि दिवस समाप्त कर सुबह 10 बजे से शाम 4 बजे तक पूर्णकालिक स्कूल संचालन के निर्णय का छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन ने कड़ा विरोध किया है। संगठन का कहना है कि यह फैसला बच्चों के सर्वांगीण विकास की अवधारणा के विपरीत है और इससे खेल, योग, सांस्कृतिक गतिविधियों तथा रचनात्मक शिक्षण को बड़ा झटका लगेगा।
छत्तीसगढ़ टीचर्स एसोसिएशन के प्रांत अध्यक्ष संजय शर्मा ने कहा कि शिक्षा केवल पाठ्यपुस्तकों तक सीमित नहीं हो सकती। विद्यालय बच्चों के व्यक्तित्व निर्माण का केंद्र हैं, जहां योग, खेलकूद, साहित्यिक गतिविधियां, सांस्कृतिक कार्यक्रम और जीवन कौशल का विकास होता है। शनिवार को गतिविधि दिवस समाप्त कर केवल नियमित कक्षाओं तक सीमित कर देना शिक्षा की मूल भावना के विपरीत है।
प्रदेश उपाध्यक्ष बसंत चतुर्वेदी ने कहा कि शनिवार बच्चों के लिए सीखने का सबसे जीवंत दिन होता है। इसी दिन भाषण, वाद-विवाद, प्रश्नोत्तरी, चित्रकला, विज्ञान गतिविधियां, पुस्तक पठन और लोक संस्कृति से जुड़े कार्यक्रम आयोजित किए जाते हैं। यदि पूरे दिन नियमित कक्षाएं संचालित होंगी तो विद्यार्थियों के रचनात्मक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ेगा।
संगठन के पदाधिकारी मुकेश मुदलियार ने कहा कि विशेषकर ग्रामीण क्षेत्रों में गतिविधि दिवस बच्चों को विद्यालय से जोड़ने का मजबूत माध्यम रहा है। खेलकूद और सांस्कृतिक कार्यक्रमों से बच्चों में नेतृत्व क्षमता, आत्मविश्वास और टीम भावना विकसित होती है। ऐसे में इस व्यवस्था को समाप्त करना शिक्षा के मानवीय पक्ष को कमजोर करेगा।
जिला अध्यक्ष भूपेश सिंह, नागेंद्र सिंह, पीतांबर मरावी और मिथिलेश पाठक सहित अन्य पदाधिकारियों ने भी शासन से निर्णय पर पुनर्विचार करने की मांग की है। उनका कहना है कि पूरे सप्ताह पढ़ाई के दबाव के बाद शनिवार बच्चों को व्यावहारिक शिक्षा, योग, खेल और सांस्कृतिक अभिव्यक्ति का अवसर देता है। यदि यह दिन भी पूर्णकालिक पढ़ाई के लिए निर्धारित कर दिया गया तो विद्यालयों का वातावरण एकरस और बोझिल हो जाएगा।
अविनाश तिवारी द्वारा जारी अभिव्यक्ति में कहा गया है कि नई शिक्षा नीति अनुभवात्मक शिक्षा, खेल, कला और जीवन कौशल पर जोर देती है। ऐसे में गतिविधि दिवस समाप्त करना नीति की भावना के विपरीत कदम माना जाएगा। संगठन ने मांग की है कि कक्षा 1 से 12वीं तक सप्ताह में एक दिन प्रातःकालीन विद्यालय संचालन तथा शनिवार को पुनः गतिविधि दिवस घोषित किया जाए, ताकि विद्यार्थियों के समग्र विकास को बढ़ावा मिल सके।
टीचर्स एसोसिएशन ने चेतावनी दी है कि यदि इस निर्णय पर पुनर्विचार नहीं किया गया तो इसका सीधा असर बच्चों के शारीरिक, मानसिक और सांस्कृतिक विकास पर पड़ेगा, जिसकी भरपाई भविष्य में करना मुश्किल होगा।

