पीएम स्वनिधि से बदली जिंदगी, 75 लाख से अधिक रेहड़ी-पटरीवालों को मिला सस्ता लोन
Last Updated:June 01, 2026, 11:19 IST
PM SVANidhi Scheme: पीएम स्वनिधि योजना के तहत रेहड़ी-पटरी लगाने वाले विक्रेताओं को बिना गारंटी 15 हजार, 25 हजार और 50 हजार रुपये तक का कार्यशील पूंजी ऋण दिया जाता है. समय पर कर्ज चुकाने वालों को 7 फीसदी वार्षिक ब्याज सब्सिडी का लाभ भी मिलता है और वे अगले चरण में अधिक राशि के ऋण के पात्र बन जाते हैं.
केंद्र सरकार की पीएम स्वनिधि योजना रेहड़ी-पटरी लगाने वाले लाखों छोटे कारोबारियों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है.
केंद्र सरकार की पीएम स्वनिधि योजना रेहड़ी-पटरी लगाने वाले लाखों छोटे कारोबारियों के लिए बड़ी राहत बनकर उभरी है. कोविड-19 महामारी के दौरान शुरू की गई इस योजना के तहत अब तक 75.5 लाख से अधिक स्ट्रीट वेंडरों को 112 लाख से ज्यादा ऋण दिए जा चुके हैं. सरकार ने योजना की सफलता को देखते हुए इसकी अवधि बढ़ाकर मार्च 2030 तक कर दी है.
योजना के तहत रेहड़ी-पटरी लगाने वाले विक्रेताओं को बिना गारंटी 15 हजार, 25 हजार और 50 हजार रुपये तक का कार्यशील पूंजी ऋण दिया जाता है. समय पर कर्ज चुकाने वालों को 7 फीसदी वार्षिक ब्याज सब्सिडी का लाभ भी मिलता है और वे अगले चरण में अधिक राशि के ऋण के पात्र बन जाते हैं.
सरकार के अनुसार, देशभर में अब तक 17,800 करोड़ रुपये से अधिक का ऋण वितरित किया जा चुका है. इसके अलावा लाभार्थियों को ब्याज सब्सिडी और डिजिटल कैशबैक के रूप में करीब 800 करोड़ रुपये का अतिरिक्त फायदा मिला है.
पीएम स्वनिधि योजना डिजिटल लेनदेन को भी बढ़ावा दे रही है. 55 लाख से अधिक विक्रेताओं ने अब तक 841 करोड़ से ज्यादा डिजिटल ट्रांजैक्शन किए हैं, जिनकी कुल कीमत लगभग 8.96 लाख करोड़ रुपये है. डिजिटल भुगतान को बढ़ावा देने के लिए 1,600 रुपये तक का कैशबैक भी दिया जाता है.
योजना के तहत स्वनिधि से समृद्धि पहल के जरिए 50 लाख से अधिक परिवारों की प्रोफाइलिंग की गई है और उन्हें केंद्र सरकार की विभिन्न कल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा गया है. अब तक 1.52 करोड़ से ज्यादा लाभ स्वीकृत किए जा चुके हैं.
सरकार का दावा है कि पीएम स्वनिधि से लाभार्थियों की आय में औसतन 20 फीसदी तक बढ़ोतरी हुई है. करीब 95 फीसदी लाभार्थियों ने पहली बार किसी औपचारिक संस्था से ऋण प्राप्त किया, जबकि 30 फीसदी लोगों को आगे अतिरिक्त ऋण सुविधाएं भी मिलीं.
योजना का सामाजिक प्रभाव भी उल्लेखनीय रहा है. करीब 46 फीसदी लाभार्थी महिलाएं हैं, जबकि 70 फीसदी लाभार्थी हाशिए पर रहने वाले समुदायों से आते हैं. सरकार का कहना है कि इस योजना ने छोटे कारोबारियों को आर्थिक रूप से मजबूत करने के साथ-साथ उन्हें औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था और सामाजिक सुरक्षा से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
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साद बिन उमर को पत्रकारिता के क्षेत्र में 15 साल से अधिक का अनुभव है, जिनमें से 12 साल उन्होंने डिजिटल पत्रकारिता को दिए है. न्यूज़18 के साथ जुड़ने से पहले उन्होंने आज तक, एनडीटीवी, पीटीआई और नया इंडिया जैसे प्र…और पढ़ें
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