Last Updated:June 01, 2026, 12:28 IST
अयोध्या की हनुमानगढ़ी मंदिर से जुड़ी प्रचलित कथा के अनुसार 18वीं शताब्दी के दौरान अवध के नवाब मंसूर अली खां के पुत्र की तबीयत अचानक बेहद खराब हो गई थी. नवाब ने अपने पुत्र के उपचार के लिए उस समय के नामी वैद्यों और हकीमों की सहायता ली, लेकिन स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ. जब सभी प्रयास विफल होते दिखाई दिए तो नवाब को हनुमान जी के परम भक्त बाबा अभयरामदास जी के बारे में जानकारी मिली. बाबा अभयरामदास उस समय अयोध्या में तप और भक्ति के लिए विख्यात संत माने जाते थे.
अयोध्या: अयोध्या की पावन धरती केवल भगवान श्रीराम की जन्मस्थली के रूप में ही नहीं बल्कि अनेक चमत्कारिक और लोकश्रुतियों से जुड़ी घटनाओं के लिए भी प्रसिद्ध है. इन्हीं में से एक कथा हनुमानगढ़ी से जुड़ी है, जहां आज भी श्रद्धालु बड़ी संख्या में बजरंगबली के दर्शन के लिए पहुंचते हैं. मान्यता है कि यहां विराजमान हनुमान जी की कृपा से अवध के एक नवाब के पुत्र को नया जीवन मिला था, जिसके बाद नवाब ने मंदिर निर्माण कराकर भूमि दान की थी. तो चलिए इस रिपोर्ट में चमत्कारी कहानी के बारे में विस्तार से जानते हैं.
अयोध्या के रक्षक हैं हनुमान
हनुमानगढ़ी अयोध्या के सबसे प्रतिष्ठित धार्मिक स्थलों में से एक है. यहां बाल स्वरूप में विराजमान हनुमान जी को अयोध्या का रक्षक और राजा माना जाता है. मंदिर से जुड़ी प्रचलित कथा के अनुसार 18वीं शताब्दी के दौरान अवध के नवाब मंसूर अली खां के पुत्र की तबीयत अचानक बेहद खराब हो गई थी. नवाब ने अपने पुत्र के उपचार के लिए उस समय के नामी वैद्यों और हकीमों की सहायता ली, लेकिन स्वास्थ्य में कोई सुधार नहीं हुआ. जब सभी प्रयास विफल होते दिखाई दिए तो नवाब को हनुमान जी के परम भक्त बाबा अभयरामदास जी के बारे में जानकारी मिली. बाबा अभयरामदास उस समय अयोध्या में तप और भक्ति के लिए विख्यात संत माने जाते थे. नवाब ने उनसे अपने पुत्र के जीवन की रक्षा के लिए प्रार्थना की. कहा जाता है कि बाबा ने हनुमान जी का स्मरण कर पुत्र के स्वास्थ्य लाभ की कामना किया.
52 बीघा दान
लोकमान्यता के अनुसार बाबा के आशीर्वाद और बजरंगबली की कृपा से नवाब का पुत्र धीरे-धीरे स्वस्थ होने लगा और कुछ समय बाद पूरी तरह निरोग हो गया. इस घटना ने नवाब को अत्यंत प्रभावित किया. उन्होंने इसे हनुमान जी की कृपा का प्रत्यक्ष चमत्कार माना और कृतज्ञता स्वरूप हनुमानगढ़ी मंदिर के निर्माण का निर्णय लिया. कहा जाता है कि नवाब ने न केवल मंदिर के निर्माण में सहयोग दिया बल्कि इसके रखरखाव और धार्मिक गतिविधियों के संचालन के लिए लगभग 52 बीघा भूमि भी दान की. यह दान मंदिर की व्यवस्थाओं को सुचारु रूप से चलाने के लिए दिया गया था.
करोड़ो श्रद्धालु के आस्था है केंद्र
हनुमानगढ़ी के निर्वाणी अनी अखाड़ा के सचिव महंत नंदराम दास महाराज बताते हैं कि यहां हनुमान जी राजा के रूप में विराजमान हैं और उनकी महिमा अपरंपार है. उनके अनुसार 18वीं शताब्दी में अवध के नवाब द्वारा इस मंदिर का निर्माण कराया गया था और तभी से यह स्थान करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का प्रमुख केंद्र बना हुआ है. आज भी हनुमानगढ़ी में दर्शन के लिए आने वाले श्रद्धालु इस कथा को श्रद्धा के साथ सुनते हैं. उनके लिए यह केवल एक ऐतिहासिक प्रसंग नहीं, बल्कि आस्था, विश्वास और हनुमान जी की कृपा का जीवंत प्रतीक है, जो सदियों बाद भी लोगों के हृदय में उसी श्रद्धा के साथ विद्यमान है.
About the Author
मैं रजनीश कुमार यादव, 2019 से पत्रकारिता से जुड़ा हूं. तीन वर्ष अमर उजाला में बतौर सिटी रिपोर्टर काम किया. तीन वर्षों से न्यूज18 डिजिटल (लोकल18) से जुड़ा हूं. ढाई वर्षों तक लोकल18 का रिपोर्टर रहा. महाकुंभ 2025 …और पढ़ें
News18 न्यूजलेटर
अब ईमेल पर इनसाइड स्टोरीज
खबरों के पीछे की खबर अब आपके इनबॉक्स में
Location :
Ayodhya,Faizabad,Uttar Pradesh

