बलरामपुर, 07 सितम्बर 2026/ ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए अवसर उपलब्ध कराने तथा लोगों को स्वरोजगार से जोड़ने के लिए शासन द्वारा विभिन्न योजनाओं के माध्यम से निरंतर प्रयास किए जा रहे हैं। इनका उद्देश्य केवल आर्थिक सहायता देना नहीं, बल्कि हितग्राहियों को उनकी रुचि और क्षमता के अनुरूप व्यवसाय स्थापित कर आत्मनिर्भर बनने का अवसर देना है। बलरामपुर विकासखंड के ग्राम करीचलगली की श्रीमती दुर्गावती सिरोटिया इसका सजीव उदाहरण हैं, जिनका वर्षों पुराना मछली पालन का सपना अब मूर्त रूप ले चुका है।
दुर्गावती बताती हैं कि उन्हें शुरू से ही मछली पालन में रुचि थी और वे स्वयं का व्यवसाय शुरू कर आजीविका मजबूत करना चाहती थीं, लेकिन पूंजी का अभाव सबसे बड़ी बाधा बना हुआ था। इसी दौरान उन्हें प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना के तहत मिलने वाले अनुदान की जानकारी मिली। योजना से जुड़कर उन्होंने वर्ष 2025-26 में बायोफ्लॉक तालाब का निर्माण कराया, जिसके लिए मत्स्य विभाग के माध्यम से उन्हें 60 प्रतिशत अनुदान प्राप्त हुआ, जबकि शेष 40 प्रतिशत राशि उन्होंने स्वयं वहन की। विभाग द्वारा आवश्यक तकनीकी सहयोग एवं मार्गदर्शन भी उपलब्ध कराया गया।
तालाब तैयार होने के बाद अब वे अपने व्यवसाय को आगे बढ़ाने की तैयारी में जुटी हैं। बायोफ्लॉक तालाब से लगभग 5 से 6 क्विंटल मछली उत्पादन की संभावना है, जिससे उन्हें करीब एक लाख रुपये तक की आय होने की उम्मीद है। दुर्गावती का कहना है कि इस क्षेत्र में प्राप्त अनुभव के आधार पर वे भविष्य में अपने व्यवसाय का विस्तार भी करेंगी।
दुर्गावती कहती हैं कि आर्थिक परेशानी के कारण जो काम वर्षों से शुरू नहीं हो पा रहा था, वह योजना से मिले अनुदान के सहारे संभव हुआ। उन्होंने कहा कि जब शासन की योजना और विभागीय सहयोग एक साथ मिलते हैं, तो आर्थिक चुनौतियों के बावजूद स्वरोजगार की नई राह बनाई जा सकती है। उनके शब्दों में, करीचलगली में तैयार हुआ यह तालाब केवल मछली उत्पादन का माध्यम नहीं, बल्कि बेहतर भविष्य, आर्थिक मजबूती और आत्मनिर्भरता की नई उम्मीद है।

