विधायक उद्धेश्वरी पैकरा और कलेक्टर चंदन संजय त्रिपाठी ने किसानों से किया संवाद, जैविक खेती, ब्रांडिंग और बेहतर बाजार उपलब्ध कराने पर जोर
बलरामपुर
के शंकरगढ़ विकासखंड अंतर्गत ग्राम चांगरो में पारंपरिक जीराफूल चावल की खेती को बढ़ावा देने और किसानों की आय में वृद्धि करने की दिशा में पहल की जा रही है। सामरी विधायक श्रीमती उद्धेश्वरी पैकरा, कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी एवं जिला पंचायत सीईओ श्री आशुतोष चतुर्वेदी ने गांव पहुंचकर किसानों और स्व सहायता समूह की महिलाओं से संवाद किया। इस दौरान जीराफूल चावल की जैविक खेती, उत्पादन विस्तार, ब्रांडिंग और विपणन को लेकर विशेष कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा हुई।
ग्रामीणों के बीच जमीन पर बैठकर अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों ने किसानों की समस्याएं सुनीं तथा उनकी खेती से जुड़ी गतिविधियों की जानकारी ली। वर्षों से जीराफूल चावल की पारंपरिक खेती कर रहे किसानों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्हें इस विशिष्ट कृषि उत्पाद को व्यापक बाजार तक पहुंचाने के लिए प्रोत्साहित किया गया।
जीआई टैग से मिली विशिष्ट पहचान
जीराफूल चावल अपनी मनमोहक सुगंध, छोटे एवं पतले दानों तथा प्राकृतिक स्वाद के लिए जाना जाता है। मार्च 2019 में इसे भौगोलिक संकेतक (जीआई) टैग प्राप्त हुआ था। पकने के दौरान फैलने वाली इसकी खास खुशबू इसे अन्य किस्मों से अलग पहचान देती है। बाजार में इसकी कीमत लगभग 100 से 120 रुपये प्रति किलोग्राम तक बताई जाती है। ऐसे में इसकी गुणवत्ता बनाए रखते हुए व्यवस्थित विपणन किया जाए, तो स्थानीय किसानों के लिए यह बेहतर आय का माध्यम बन सकता है।
जैविक खेती को बढ़ावा देने पर जोर
सामरी विधायक श्रीमती उद्धेश्वरी पैकरा ने किसानों को रासायनिक खाद के उपयोग से दूरी बनाते हुए जैविक पद्धति से खेती करने के लिए प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि चांगरो का जीराफूल चावल क्षेत्र की महत्वपूर्ण पारंपरिक पहचान है। इसकी विशिष्टता को जिले तक सीमित न रखते हुए राज्य और देश के व्यापक बाजार तक पहुंचाने की जरूरत है। उन्होंने किसानों और खेती से जुड़ी महिलाओं की आर्थिक स्थिति मजबूत करने के लिए हरसंभव सहयोग का भरोसा दिलाया।
ब्रांडिंग और बेहतर बाजार की तैयारी
कलेक्टर श्रीमती चंदन संजय त्रिपाठी ने कहा कि राज्य शासन के सहयोग से जीराफूल चावल की बेहतर मार्केटिंग सुनिश्चित करने का प्रयास किया जाएगा, ताकि किसानों को उनकी उपज का उचित मूल्य मिल सके। इसके लिए विशेष कार्ययोजना तैयार कर चांगरो के जीराफूल चावल की प्रभावी ब्रांडिंग की जाएगी। उन्होंने बताया कि शंकरगढ़ क्षेत्र के लगभग 30 गांवों में जीराफूल की खेती हो रही है। इसके उत्पादन क्षेत्र का विस्तार करने की दिशा में भी प्रयास किए जाएंगे।
10 महिला समूह खेती से जुड़े, एफपीओ से जोड़ने के निर्देश
चांगरो में जीराफूल चावल की खेती और उससे जुड़ी गतिविधियों में 10 स्व सहायता समूह सक्रिय हैं। प्रत्येक समूह में 12 से 15 महिलाएं कार्यरत हैं। इन महिलाओं की भागीदारी को आजीविका का मजबूत आधार बनाने के उद्देश्य से कलेक्टर ने समूहों को शंकरगढ़ में स्थापित आत्मनिर्भर बलरामपुर किसान उत्पादक संगठन (एफपीओ) से जोड़ने के निर्देश दिए। इससे किसानों को कम लागत पर गुणवत्तापूर्ण कृषि सामग्री और आवश्यक सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिलने की उम्मीद है।
राइस मिल और इलेक्ट्रिक ढेंकी की स्थापना पर चर्चा
किसानों को स्थानीय स्तर पर ही बेहतर सुविधाएं और बाजार उपलब्ध कराने के लिए क्षेत्र में राइस मिल स्थापित करने की संभावनाओं पर भी चर्चा की गई। इसके साथ ही पारंपरिक लकड़ी की ढेंकी के आधुनिक स्वरूप इलेक्ट्रिक ढेंकी की स्थापना पर विचार किया गया, ताकि चावल की प्रसंस्करण प्रक्रिया को सुविधाजनक बनाया जा सके और उत्पाद की पारंपरिक पहचान भी कायम रहे।
ग्राम चांगरो में हुई इस पहल से जीराफूल चावल की खेती को संगठित स्वरूप देने, महिला स्व सहायता समूहों की भागीदारी बढ़ाने और स्थानीय उत्पाद को बाजार में अलग पहचान दिलाने की दिशा में उम्मीद जगी है। अब विशेष कार्ययोजना, ब्रांडिंग और विपणन संबंधी प्रयासों के क्रियान्वयन से यह स्पष्ट होगा कि क्षेत्र के किसानों को इसका कितना आर्थिक लाभ मिल पाता है।

