मुआवजा और सख्त कार्रवाई की मांग को लेकर शव रखकर चक्काजाम, बीपीसीएल की सुरक्षा व्यवस्था पर उठे सवाल…
चंद्रिका कुशवाहा,सूरजपुर/एमसीबी
मनेंद्रगढ़ में बीपीसीएल की गैस पाइपलाइन परियोजना के दौरान हुए दर्दनाक सड़क हादसे ने सुरक्षा व्यवस्थाओं पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। आस्था रेस्टोरेंट के समीप पाइपलाइन कार्य में लगी जेसीबी की टक्कर से एक युवक की मौत हो गई, जबकि उसका साथी गंभीर रूप से घायल हो गया। हादसे के बाद परिजनों का आक्रोश इस कदर बढ़ा कि उन्होंने कांग्रेस कार्यकर्ताओं के साथ पहले कोतवाली का घेराव किया और बाद में शव सड़क पर रखकर चक्काजाम कर दिया। करीब दो घंटे तक मुख्य मार्ग पूरी तरह जाम रहा और प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी होती रही।
जानकारी के अनुसार, शुक्रवार रात करीब 8:20 बजे राघवेंद्र अपने साथी सागर को स्कूटी से घर छोड़ने जा रहा था। दोनों मनेंद्रगढ़ के एक ढाबे में काम करते थे और प्रतिदिन की तरह काम खत्म कर लौट रहे थे। जैसे ही वे राष्ट्रीय राजमार्ग-43 स्थित आस्था रेस्टोरेंट के पास पहुंचे, गैस पाइपलाइन परियोजना में लगी जेसीबी ने उनकी स्कूटी को टक्कर मार दी। हादसे में दोनों युवक गंभीर रूप से घायल हो गए। स्थानीय लोगों ने तत्काल दोनों को जिला अस्पताल पहुंचाया, जहां चिकित्सकों ने राघवेंद्र को मृत घोषित कर दिया। गंभीर रूप से घायल सागर को बेहतर उपचार के लिए अंबिकापुर मेडिकल कॉलेज रेफर किया गया।
प्रत्यक्षदर्शियों और परिजनों का आरोप है कि जेसीबी चालक लापरवाहीपूर्वक वाहन चला रहा था। उनका कहना है कि निर्माण कार्य के दौरान न तो पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम थे और न ही यातायात नियंत्रित करने की कोई व्यवस्था दिखाई दे रही थी। इसी लापरवाही ने एक मेहनतकश युवक की जान ले ली।
घटना की जानकारी मिलते ही शनिवार सुबह मृतक के परिजन और बड़ी संख्या में कांग्रेस कार्यकर्ता सिटी कोतवाली पहुंच गए। प्रदर्शनकारियों ने जेसीबी जब्त करने, चालक की तत्काल गिरफ्तारी और मृतक के परिवार को उचित मुआवजा देने की मांग करते हुए धरना शुरू कर दिया। जब काफी देर तक कोई ठोस आश्वासन नहीं मिला तो आक्रोशित परिजनों ने मृतक का शव मुख्य सड़क पर रख दिया। इसके बाद शहर का प्रमुख मार्ग पूरी तरह जाम हो गया और दोनों ओर वाहनों की लंबी कतार लग गई।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक पुष्पेंद्र नायक, राजस्व अधिकारियों और पुलिस बल ने मौके पर पहुंचकर प्रदर्शनकारियों से बातचीत की। काफी देर तक चली चर्चा के बाद प्रशासन ने तत्काल 25 हजार रुपये की आर्थिक सहायता देने, एंबुलेंस की व्यवस्था कराने तथा शासन के नियमानुसार अन्य मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। इसके बाद परिजन शांत हुए और चक्काजाम समाप्त किया गया।
पुलिस ने इस मामले में जेसीबी चालक के खिलाफ भारतीय न्याय संहिता (बीएनएस) की धारा 106(1), 125(ए) और 281 के तहत अपराध दर्ज कर विवेचना शुरू कर दी है। अधिकारियों के अनुसार दुर्घटना वाली रात ही एफआईआर दर्ज कर ली गई थी और वाहन व चालक से जुड़े तथ्यों की जांच की जा रही है।
इधर, हादसे के बाद बीपीसीएल की गैस पाइपलाइन परियोजना की कार्यप्रणाली भी सवालों के घेरे में आ गई है। स्थानीय लोगों का कहना है कि शहर में कई स्थानों पर सड़क खोदकर छोड़ दी गई है। पर्याप्त बैरिकेडिंग, चेतावनी संकेत और सुरक्षा व्यवस्था के अभाव में दुर्घटनाओं का खतरा लगातार बना हुआ है। लोगों का आरोप है कि निर्माण एजेंसी द्वारा सुरक्षा मानकों का पूरी तरह पालन नहीं किया जा रहा, जिससे आम नागरिकों की जान जोखिम में पड़ रही है।
मृतक के परिजनों और स्थानीय नागरिकों ने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच, दोषियों के खिलाफ कठोर कार्रवाई तथा परियोजना स्थल पर सुरक्षा मानकों का कड़ाई से पालन सुनिश्चित कराने की मांग की है। उनका कहना है कि यदि समय रहते आवश्यक सुरक्षा व्यवस्था की गई होती, तो शायद एक परिवार का सहारा आज जीवित होता।

