नई दिल्ली। भारतीय सेना अपनी मारक क्षमता और आधुनिक युद्धक क्षमता को और मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम उठाने जा रही है। सेना करीब 1,600 करोड़ रुपये की लागत से 840 कामिकेज (लोइटरिंग म्यूनिशन) ड्रोन खरीदेगी। इस परियोजना के लिए टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स और निबे डिफेंस को सबसे कम बोली लगाने वाली कंपनियों के रूप में चुना गया है।
टाटा को मिला सबसे बड़ा हिस्सा
रक्षा सूत्रों के अनुसार, इस डील में टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स सबसे कम बोलीदाता (L1) रही है, जबकि निबे डिफेंस दूसरे स्थान (L2) पर रही।
- टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स को कुल ऑर्डर का 64 प्रतिशत हिस्सा मिलेगा।
- निबे डिफेंस को शेष 36 प्रतिशत ऑर्डर दिया जाएगा।
100 किलोमीटर तक होगी मारक क्षमता
इस खरीद के तहत सेना को 100 किलोमीटर तक की रेंज वाले लोइटरिंग म्यूनिशन (कामिकेज) ड्रोन मिलेंगे। ये ड्रोन लक्ष्य के ऊपर मंडराने (Loiter) के बाद सटीक निशाना लगाकर स्वयं विस्फोट करने में सक्षम होते हैं, जिससे दुश्मन के ठिकानों, बंकरों और सैन्य उपकरणों को प्रभावी ढंग से नष्ट किया जा सकता है।
नई ड्रोन आर्टिलरी रेजिमेंट का होंगे हिस्सा
इन ड्रोनों को भारतीय सेना की नई बनाई जा रही ‘ड्रोन आर्टिलरी रेजिमेंट्स’ में शामिल किया जाएगा। इनका उद्देश्य पारंपरिक तोपखाने के साथ आधुनिक ड्रोन युद्ध क्षमता को जोड़ना और सीमावर्ती क्षेत्रों में सेना की आक्रामक क्षमता बढ़ाना है।
स्वदेशी तकनीक पर रहेगा जोर
टाटा एडवांस्ड सिस्टम्स अपनी पूरी तरह स्वदेशी ALS सीरीज के लोइटरिंग सिस्टम की आपूर्ति करेगी। वहीं, निबे डिफेंस ‘वायु अस्त्र’ (Vayu Astra) ड्रोन उपलब्ध कराएगी, जो इजरायली तकनीक पर आधारित बताया जा रहा है।
फास्ट-ट्रैक मोड में होगी डिलीवरी
रक्षा सूत्रों के मुताबिक, यह खरीद फास्ट-ट्रैक प्रक्रिया के तहत की जा रही है। इसके तहत दोनों कंपनियों को अगले छह महीने के भीतर ड्रोन की आपूर्ति शुरू करनी होगी, ताकि सेना को जल्द से जल्द आधुनिक हथियार प्रणाली उपलब्ध कराई जा सके।
यह खरीद भारतीय सेना के आधुनिकीकरण और ‘आत्मनिर्भर भारत’ अभियान के तहत स्वदेशी रक्षा उत्पादन को बढ़ावा देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम मानी जा रही है।

