जयपुर, 04 जुलाई। प्रधानमंत्री Narendra Modi ने राजस्थान में आयोजित कार्यक्रम के दौरान ऊर्जा सुरक्षा को लेकर बड़ा बयान दिया। राजस्थान रिफाइनरी के उद्घाटन अवसर पर उन्होंने कहा कि पश्चिमी एशिया में हुए युद्ध के कारण दुनिया 21वीं सदी के सबसे बड़े ऊर्जा संकट का सामना कर रही थी, लेकिन भारत ने दूरदर्शी नीतियों और संसाधनों के प्रभावी प्रबंधन के दम पर इस चुनौती का सफलतापूर्वक सामना किया।
प्रधानमंत्री ने कहा कि यदि समय रहते उचित कदम नहीं उठाए जाते, तो देश में घरेलू एलपीजी सिलेंडर की कीमत लगभग 2,000 रुपये तक पहुंच सकती थी। उन्होंने कहा कि सरकार की रणनीति और ऊर्जा क्षेत्र में किए गए सुधारों की वजह से देश इस बड़े संकट से सुरक्षित निकल सका।
पश्चिमी एशिया के युद्ध का पड़ा वैश्विक असर
प्रधानमंत्री ने अपने संबोधन में कहा कि पश्चिमी एशिया में संघर्ष और युद्ध की स्थिति का सीधा असर वैश्विक ऊर्जा बाजार पर पड़ा। कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से कई देशों में ईंधन की कीमतें तेजी से बढ़ीं। दुनिया के अनेक देशों को ऊर्जा संकट और महंगाई का सामना करना पड़ा।
उन्होंने कहा कि ऐसे कठिन समय में भारत ने संतुलित नीति अपनाई और अपनी ऊर्जा आवश्यकताओं को पूरा करने के लिए विभिन्न स्रोतों का प्रभावी उपयोग किया। इसी कारण देश बड़े आर्थिक झटके से बच सका।
‘सही रणनीति से देश को मिला लाभ’
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत ने समय रहते ऊर्जा आपूर्ति के विविध स्रोत विकसित किए और आवश्यक संसाधनों का बेहतर प्रबंधन किया। सरकार ने आम नागरिकों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ कम करने के लिए कई स्तरों पर काम किया, जिससे घरेलू उपभोक्ताओं को राहत मिली।
उन्होंने कहा कि यदि सरकार समय पर फैसले नहीं लेती, तो रसोई गैस समेत अन्य ईंधनों की कीमतों में और अधिक बढ़ोतरी देखने को मिल सकती थी।
राजस्थान रिफाइनरी को बताया विकास का बड़ा केंद्र
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री ने राजस्थान रिफाइनरी को देश के ऊर्जा क्षेत्र की महत्वपूर्ण परियोजनाओं में से एक बताया। उन्होंने कहा कि इस परियोजना से प्रदेश में औद्योगिक विकास को गति मिलेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और पेट्रोकेमिकल क्षेत्र को भी मजबूती मिलेगी।
प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसी परियोजनाएं भारत को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगी और भविष्य की जरूरतों को पूरा करने में सहायक होंगी।
ऊर्जा सुरक्षा पर सरकार का फोकस
प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत आने वाले वर्षों में ऊर्जा सुरक्षा, हरित ऊर्जा और आधुनिक बुनियादी ढांचे पर लगातार निवेश कर रहा है। सौर ऊर्जा, जैव ईंधन, हरित हाइड्रोजन और रिफाइनिंग क्षमता बढ़ाने जैसे क्षेत्रों में तेजी से काम किया जा रहा है।
उन्होंने विश्वास जताया कि इन प्रयासों से देश की ऊर्जा आवश्यकताएं बेहतर ढंग से पूरी होंगी और वैश्विक परिस्थितियों का असर भारतीय उपभोक्ताओं पर कम से कम पड़ेगा।
अपने संबोधन के अंत में प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत का लक्ष्य केवल ऊर्जा की उपलब्धता सुनिश्चित करना नहीं, बल्कि ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनना भी है। उन्होंने कहा कि सरकार आधुनिक तकनीक, मजबूत आधारभूत संरचना और दीर्घकालिक योजनाओं के माध्यम से देश के ऊर्जा क्षेत्र को नई ऊंचाइयों तक पहुंचाने के लिए लगातार कार्य कर रही है।

