समाज के लिए छोड़ गए अमर संदेश
चंद्रिका कुशवाहा, सूरजपुर
कहते हैं, कुछ लोग अपनी जिंदगी से नहीं, बल्कि अपने जाने के बाद भी समाज को नई राह दिखा जाते हैं। सूरजपुर जिले में ऐसा ही एक प्रेरणादायी उदाहरण सामने आया है, जिसने मानवता, सेवा और परोपकार की नई मिसाल कायम कर दी। ग्राम चंद्रेली निवासी गवटू दास ने अपने जीवनकाल में जनसेवा की भावना को अपनाया और उनके निधन के बाद परिवार ने ऐसा ऐतिहासिक निर्णय लिया, जिसकी पूरे क्षेत्र में सराहना हो रही है।
परिजनों ने सामाजिक रूढ़ियों और परंपरागत सोच से ऊपर उठते हुए गवटू दास के पार्थिव शरीर का देहदान करने का निर्णय लिया। बताया जा रहा है कि यह सूरजपुर जिले का पहला देहदान है, जो चिकित्सा शिक्षा और शोध के लिए समर्पित किया गया। इस निर्णय को चिकित्सा जगत और समाज सुधार की दिशा में एक ऐतिहासिक कदम माना जा रहा है।
26 जून 2026 को कबीर वाणी और पूर्ण गुरु की मर्यादा के अनुसार अंतिम संस्कार की धार्मिक प्रक्रिया पूरी की गई। इसके बाद पूरे सम्मान के साथ पार्थिव शरीर को शासकीय चिकित्सा महाविद्यालय, अंबिकापुर भेजा गया, जहां डॉक्टरों की टीम को चिकित्सा अध्ययन एवं शोध के लिए देह सौंप दी गई।
इस प्रेरणादायी पहल की पूरे क्षेत्र में चर्चा हो रही है। चिकित्सकों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों ने परिवार के इस निर्णय की मुक्त कंठ से प्रशंसा की। उनका कहना है कि दुख की घड़ी में भी लिया गया यह फैसला समाज में देहदान के प्रति जागरूकता बढ़ाएगा और अंधविश्वास व रूढ़िवादिता को दूर करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगा।
वास्तव में, कुछ लोग केवल जीते-जी ही नहीं, बल्कि मृत्यु के बाद भी मानवता की सेवा करते हैं। गवटू दास का यह महादान आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा और यह संदेश देगा कि सबसे बड़ा दान वही है, जो किसी अनजान व्यक्ति के जीवन को रोशनी दे सके।

