छत्तीसगढ़ :.सूरजपुर ने रचा इतिहास! जिस आम की कीमत सुनकर दुनिया हैरान, उसी ने दिलाया जिले को पहला सम्मान
चंद्रिका कुशवाहा,सूरजपुर
जिले ने उद्यानिकी के क्षेत्र में ऐसा इतिहास रच दिया है, जिसने पूरे छत्तीसगढ़ का ध्यान अपनी ओर खींच लिया है। जिस विदेशी आम की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में ढाई से तीन लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक बताई जाती है, उसी दुर्लभ ‘मियाज़ाकी’ आम ने बस्तर आम महोत्सव में सूरजपुर का परचम लहराया। जिले के प्रगतिशील कृषक श्री राजेंद्र प्रसाद गुप्ता ने अपनी अनूठी खेती और उत्कृष्ट आम की किस्मों के दम पर प्रथम पुरस्कार हासिल कर सूरजपुर का नाम गौरवान्वित कर दिया।
महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, दुर्ग के तत्वावधान में 13 एवं 14 जून को जगदलपुर में आयोजित बस्तर आम महोत्सव में देशी-विदेशी आमों की सैकड़ों आकर्षक किस्मों का प्रदर्शन किया गया। इस प्रतिष्ठित प्रतियोगिता में सूरजपुर जिले के ग्राम कमलपुर निवासी प्रगतिशील कृषक राजेंद्र प्रसाद गुप्ता के प्रक्षेत्र में तैयार विदेशी किस्म मियाज़ाकी तथा उन्नत किस्म गुलाबखास का प्रदर्शन उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, सिलफिली द्वारा किया गया।
प्रतियोगिता में छत्तीसगढ़ के विभिन्न जिलों से लाई गई उत्कृष्ट आम की किस्मों के बीच मियाज़ाकी और गुलाबखास को प्रथम पुरस्कार, जबकि लोकप्रिय किस्म दशहरी को द्वितीय पुरस्कार प्राप्त हुआ। यह उपलब्धि न केवल श्री गुप्ता के लिए, बल्कि पूरे सूरजपुर जिले के लिए गर्व का विषय बन गई है।
सबसे खास बात यह है कि श्री गुप्ता के बागान में विदेशी किस्म मियाज़ाकी के पौधे सफलतापूर्वक फल दे रहे हैं। विश्व के सबसे महंगे आमों में शामिल इस किस्म की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में लगभग 2.5 से 3 लाख रुपये प्रति किलोग्राम तक मानी जाती है और वर्तमान में इसके फल उनके प्रक्षेत्र में उपलब्ध हैं। साथ ही उन्होंने लगभग 70 विदेशी आम की किस्मों, ड्रैगन फ्रूट, वीएनआर अमरूद, नारियल, बांस की विभिन्न प्रजातियों तथा नींबू वर्गीय फसलों का भी सफल संरक्षण एवं उत्पादन किया है।
इस उल्लेखनीय उपलब्धि पर महात्मा गांधी उद्यानिकी एवं वानिकी विश्वविद्यालय, दुर्ग के निदेशक (प्रसार शिक्षा एवं प्रशिक्षण) एवं अधिष्ठाता, उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, सिलफिली, डॉ. रविंद्र तिग्गा ने श्री गुप्ता को प्रशस्ति-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया तथा सहजन के उत्कृष्ट पौधे भेंट किए।
महाविद्यालय के प्राध्यापकों एवं कर्मचारियों ने श्री गुप्ता को बधाई देते हुए आश्वस्त किया कि उनके प्रक्षेत्र में संरक्षित विदेशी एवं उन्नत उद्यानिकी फसलों के संरक्षण, उत्पादन और तकनीकी समस्याओं के समाधान हेतु निरंतर सहयोग दिया जाएगा। विशेषज्ञों का मानना है कि श्री गुप्ता की यह पहल क्षेत्र के किसानों के लिए प्रेरणा बनेगी और फसल विविधीकरण के माध्यम से किसानों की आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।
कार्यक्रम में उद्यानिकी महाविद्यालय एवं अनुसंधान केंद्र, सिलफिली के समस्त प्राध्यापक एवं कर्मचारी उपस्थित रहे,
सूरजपुर की यह ऐतिहासिक उपलब्धि साबित करती है कि आधुनिक सोच, वैज्ञानिक खेती और नवाचार के दम पर ग्रामीण किसान भी अंतरराष्ट्रीय पहचान हासिल कर सकते हैं।

