सूरजपुर : तहसील परिसर में किसानों का फूटा गुस्सा : “जुताई रुकी, खेत सूने”—किसानों का बड़ा आरोप! प्रतापपुर में किसानों का शक्ति प्रदर्शन! सरकार पर साधा निशाना, अब आर-पार की लड़ाई के मूड में अन्नदाता..
काला बाजारी, खाद संकट और पेट्रोल पंपों की मनमानी के खिलाफ तहसील परिसर में जोरदार प्रदर्शन
चंद्रिका कुशवाहा , सूरजपुर
खरीफ सीजन की शुरुआत के साथ ही किसानों को डीजल, खाद और उर्वरक की उपलब्धता में आ रही गंभीर परेशानियों को लेकर प्रतापपुर तहसील परिसर में किसानों का आक्रोश फूट पड़ा। किसान नेताओं और बड़ी संख्या में ग्रामीण किसानों ने एसडीएम कार्यालय का घेराव कर सरकार एवं प्रशासन के खिलाफ जमकर नारेबाजी की तथा अपनी विभिन्न मांगों को लेकर ज्ञापन सौंपा।
किसानों का कहना है कि प्रतापपुर विकासखंड के जरही, सोनगरा, खड़गवां, धोन्धा, रामपुर, भैसामुंडा, पोड़मोड़ और प्रतापपुर क्षेत्र में पेट्रोल पंप तो हैं, लेकिन ग्रामीण अंचलों से उनकी दूरी औसतन 20 किलोमीटर तक है। इसके बावजूद किसानों को जरीकन (डिब्बे) में डीजल देने से मना किया जा रहा है। ट्रैक्टर लेकर पहुंचने पर भी मात्र एक हजार रुपये का डीजल दिया जा रहा है, जिससे खेती-किसानी का कार्य बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
किसानों ने आरोप लगाया कि खरीफ फसल की तैयारी शुरू हो चुकी है, खेतों की जुताई, बीड़ा निर्माण और सिंचाई का कार्य तेजी से किया जाना है, लेकिन डीजल की अनुपलब्धता के कारण किसान भारी संकट से गुजर रहे हैं। ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे कृषि यंत्र और हस्तचालित मशीनों का उपयोग किया जाता है, जिन्हें पेट्रोल पंप तक ले जाना संभव नहीं है। इसके बावजूद किसानों को राहत नहीं दी जा रही है।
खाद और उर्वरक की किल्लत पर भी भड़के किसान,
धरना प्रदर्शन के दौरान किसानों ने सहकारी समितियों में खाद और यूरिया की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने की मांग की। किसानों ने कहा कि उर्वरक के लिए परमिट जारी करने की प्रक्रिया को सरल और त्वरित बनाया जाए तथा जिला सहकारी बैंक में जमा चेक राशि का एक ही दिन में खाते में अंतरण कर किसानों को नगद निकासी की सुविधा दी जाए।
काला बाजारी रोकने की मांग,
किसानों ने निजी उर्वरक एवं बीज विक्रेताओं पर भी गंभीर आरोप लगाए। उनका कहना है कि कई व्यापारी स्टॉक छिपाकर खाद की काला बाजारी कर रहे हैं और किसानों को महंगे दामों पर उर्वरक बेच रहे हैं। किसानों ने मांग की कि निजी दुकानों के स्टॉक का नियमित भौतिक सत्यापन कराया जाए, अधिकतम खुदरा मूल्य (MRP) और कंपनी के बिलों की जांच की जाए तथा दोषी पाए जाने वाले व्यापारियों के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई की जाए।
50 लीटर डीजल देने की प्रमुख मांग,
किसानों ने प्रशासन से मांग की कि ग्रामीण क्षेत्र के प्रत्येक किसान को जुताई एवं सिंचाई कार्य के लिए जरीकन में कम से कम 50 लीटर डीजल अनिवार्य रूप से उपलब्ध कराया जाए। उनका कहना है कि वर्तमान व्यवस्था किसानों के लिए अव्यावहारिक और नुकसानदायक साबित हो रही है।
मांगें नहीं मानी गईं तो होगा उग्र आंदोलन,
किसानों ने स्पष्ट चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर शीघ्र कार्रवाई नहीं की गई तो आने वाले दिनों में आंदोलन को और उग्र रूप दिया जाएगा, जिसकी पूरी जिम्मेदारी प्रशासन और सरकार की होगी।
धरना-प्रदर्शन में मुख्य रूप से विद्यासागर आयाम, नवीन जायसवाल, त्रिभुवन सिंह, जगत लाल आयाम, सुरेश चक्रधारी, शिवकुमार जायसवाल, नेहरू पटेल, विनोद नेताम, राजू सिंह आयाम, कलमेश राजवाड़े, प्यारेलाल नागवंशी, रामजनम यादव, जानसाय, विजय कुशवाहा सहित बड़ी संख्या में किसान उपस्थित रहे।
किसानों का कहना है कि यदि समय रहते डीजल, खाद और बीज की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो खरीफ सीजन प्रभावित होगा और इसका सीधा असर किसानों की आजीविका पर पड़ेगा।

