नई दिल्ली। वास्तु शास्त्र में भगवान गणेश को विघ्नहर्ता और सुख-समृद्धि के देवता माना गया है। मान्यता है कि घर में गणेश जी की मूर्ति स्थापित करने से जीवन की बाधाएं दूर होती हैं और घर में सकारात्मक ऊर्जा, शांति और समृद्धि का वास होता है।
हालांकि, वास्तु विशेषज्ञों के अनुसार गणेश जी की मूर्ति की स्थापना करते समय कुछ नियमों का पालन करना अत्यंत आवश्यक होता है। गलत दिशा या गलत मुद्रा में मूर्ति रखने से नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है और जीवन में परेशानियां बढ़ सकती हैं।
कौन-सी मुद्रा है सबसे शुभ?
वास्तु शास्त्र के अनुसार घर में बैठी हुई मुद्रा (ललितासन) में गणेश जी की मूर्ति रखना सबसे शुभ माना जाता है। ऐसी मूर्ति घर में धन, सुख और शांति को आकर्षित करती है और पारिवारिक जीवन में संतुलन बनाए रखती है।
IND W vs NED W : आज मैदान में उतरेगी भारतीय महिला टीम, नीदरलैंड्स को हराकर जीत की हैट्रिक की ओर कदम
इसके विपरीत खड़ी मुद्रा वाली गणेश प्रतिमा को घर में रखने से बचने की सलाह दी जाती है। इसे अधिकतर व्यापारिक स्थानों जैसे ऑफिस या दुकान में रखा जाना शुभ माना जाता है, जिससे कार्यों में गति बनी रहती है।
सूंड की दिशा का महत्व
गणेश जी की मूर्ति में सूंड की दिशा भी विशेष महत्व रखती है। बाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति को घर के लिए अत्यंत शुभ माना जाता है। ऐसी मूर्ति की पूजा से सुख-शांति और समृद्धि का आगमन होता है।
वहीं दाईं ओर मुड़ी सूंड वाले गणपति को सिद्धि विनायक स्वरूप माना जाता है, जिनकी पूजा विशेष नियमों के साथ की जाती है और इन्हें सामान्यतः मंदिरों में स्थापित किया जाता है।
सही दिशा और स्थापना के नियम
वास्तु शास्त्र के अनुसार गणेश जी की मूर्ति को घर की उत्तर-पूर्व दिशा में स्थापित करना सबसे शुभ माना जाता है। इसके अलावा उत्तर या पश्चिम दिशा भी उपयुक्त मानी जाती है। सही दिशा में मूर्ति स्थापित करने से घर में सकारात्मक ऊर्जा का प्रवाह बना रहता है।
मूर्ति चुनते समय रखें इन बातों का ध्यान
गणेश जी की मूर्ति लेते समय यह सुनिश्चित करना चाहिए कि उनके हाथ में मोदक हो और उनके साथ उनका वाहन मूषक भी अंकित हो। इन प्रतीकों के बिना मूर्ति अधूरी मानी जाती है।
वास्तु शास्त्र के अनुसार इन नियमों का पालन करने से भगवान गणेश की कृपा प्राप्त होती है और घर में सुख-शांति, समृद्धि तथा सफलता बनी रहती है।

